कोविड के दौरान कोलोरेक्टल कैंसर का निदान 40 प्रतिशत से ज्यादा गिरा

 कोविड के दौरान कोलोरेक्टल कैंसर का निदान 40 प्रतिशत से ज्यादा गिरा
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विएना, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोरोना महामारी के दौरान कैंसर की जांच और निदान में काफी गिरावट आई है, जिसमें स्पेनिश शोधकर्ताओं ने नए निष्कर्ष पेश किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कोविड के दौरान एक साल में निदान किए गए कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों की संख्या में 40 फीसदी की गिरावट आई है। संयुक्त यूरोपीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सप्ताह में प्रस्तुत अध्ययन, स्पेन के कई अस्पतालों में आयोजित किए गए थे। दो साल की अवधि में निदान किए गए कोलोरेक्टल कैंसर के 1,385 मामलों में से लगभग दो तिहाई (868 मामले, या 62.7 प्रतिशत) का निदान पूर्व-महामारी वर्ष में 24,860 कॉलोनोस्कोपी से किया गया था। इसके विपरीत, महामारी के दौरान केवल 517 मामलों (37.3 प्रतिशत) का निदान किया गया, जिसमें प्रदर्शन की गई कॉलोनोस्कोपी की संख्या में 27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,337 हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, गिरावट स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के निलंबन और महामारी के दौरान गैर-जरूरी कॉलोनोस्कोपी जांच के स्थगन का परिणाम है। महामारी की अवधि में कोलोरेक्टल कैंसर की जांच से कम कैंसर की पहचान की गई। पूर्व-महामारी वर्ष में 182 (21 प्रतिशत) की तुलना में केवल 22 (4.3 प्रतिशत) मामले पाए गए। महामारी के दौरान, पूर्व-महामारी वर्ष (69 प्रतिशत) की तुलना में लक्षणों के माध्यम से अधिक रोगियों का निदान (81.2 प्रतिशत) किया गया। प्रमुख लेखक डॉ मारिया जोस डोमपर अर्नल, यूनिवर्सिटी क्लिनिक अस्पताल और स्पेन में आरागॉन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईआईएस आरागॉन) ने कहा, ये वास्तव में बहुत चिंताजनक निष्कर्ष हैं कि कोलोरेक्टल कैंसर के मामले निस्संदेह महामारी के दौरान अनियंत्रित हो गए। न केवल कम निदान हुए, बल्कि निदान किए गए लोग बाद के चरण में हैं और अधिक गंभीर लक्षणों से पीड़ित हैं। इसके अलावा, महामारी के दौरान, गंभीर जटिलताओं का निदान करने वाले रोगियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि (14.7 प्रतिशत) हुई, जैसे कि आंत्र वेध, फोड़े, आंत्र रुकावट और रक्तस्राव जैसे लक्षणों में वृद्धि के साथ अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। महामारी वर्ष के दौरान निदान किए जा रहे चरण चार के कैंसर की संख्या में भी 19.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अर्नल ने कहा, कोलोरेक्टल कैंसर अक्सर इलाज योग्य होता है अगर यह प्रारंभिक चरण में पकड़ा जाए। हमारी चिंता यह है कि हम इस प्रारंभिक चरण में रोगियों का निदान करने का अवसर खो रहे हैं और इसका रोगी के परिणामों और अस्तित्व पर असर पड़ेगा। हमें आने वाले वर्षों में इस गिरावट को देखने की संभावना है। --आईएएनएस एसएस/आरजेएस

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