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जिनका समग्र जीवन स्वयं एक प्रयोगशाला था

जिनका समग्र जीवन स्वयं एक प्रयोगशाला था

भारत में विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है। वे अध्यात्म की अतल गहराइयों में डुबकी लगाने वाले योग साधक थे तो व्यवहार में जीने वाले गुरु भी थे। वे प्रज्ञा के पारगामी थे तो विनम्रता की बेमिशाल नजीर भी थे। वे करुणा के सागर थे तो प्रखर समाज सुधारक भी थे। उनमें वक्तृता थी तो शालीनता भी। कृशता थी तो तेजस्विता भी। आभिजात्य मुस्कानों के निधान अतीन्द्रिय चेतना के धनी प्रकृति में निहित गूढ़ रहस्यों को अनावृत्त करने में सतत् संलग्न समर्पण और पुरुषार्थ की मशाल सादगी और सरलता से ओतप्रोत स्वामी विवेकानन्द का समग्र जीवन स्वयं एक प्रयोगशाला था।  स्वामी विवेकानन्द
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