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विधानसभा में बिना चर्चा के प्रस्ताव पारित कराना दुर्भाग्यपूर्ण : दीपक प्रकाश

विधानसभा में बिना चर्चा के प्रस्ताव पारित कराना दुर्भाग्यपूर्ण : दीपक प्रकाश

विधानसभा से बिना चर्चा प्रस्ताव पारित करवाना दुर्भाग्यपूर्ण : दीपक प्रकाश रांची, 23 मार्च (हि. स.)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने झारखंड में एनपीआर और एनआरसी लागू नहीं करने का प्रस्ताव झारखंड विधानसभा में पारित किये जाने का कड़ा विरोध किया है। प्रकाश ने सोमवार को कहा कि आज पूरा देश जब कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ

रहा है। आज जब देश में कोरोना वायरस के कारण आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। यहां तक कि झारखंड सहित कई राज्यों में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। इस परिस्थिति में झारखंड सरकार द्वारा एनपीआर और एनआरसी के विरोध में विधान सभा से बिना चर्चा के प्रस्ताव पारित कराना एक दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस विकट परिस्थिति में जहां सरकार को कोरोना वायरस से लड़ने का ब्लू प्रिंट तैयार करना चाहिए था। वहीं सरकार एनपीआर और एनआरसी के विरोध में चोरी छीपे बिना व्यापक चर्चा के प्रस्ताव पारित करवा रही है। उन्होंने कहा यह दोनों विषय पूर्ण तरीके से केंद्र सरकार के विषय है। झारखंड सरकार यह समझ चुकी है की जनता देश में एनपीआर और एनआरसी लागू होते देखना चाहती है और अब जबकि सभी का ध्यान कोरोना वायरस से बचाव पर टिका हुआ है। ठीक उसी वक्त सरकार द्वारा यह प्रस्ताव पारित करना यह साफ दिखाता है की सरकार का मुख्य ध्येय सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति करना है। प्रकाश ने कहा कि एनपीआर पॉपुलेशन रजिस्टर है इसमें जो भी रहते हैं उनके नाम रजिस्टर किए जाते हैं। यह हर 10 साल में होने वाली जनगणना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि देश के सभी निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना ही एनपीआर का मुख्य उद्देश्य है। इसके आधार पर देश की अलग-अलग योजनाओं का आकार बनता है जबकि एनआरसी लोगों को नागरिकता देने का एक जरिया है और दोनों ही चीजें किसी भी देश के सामाजिक उन्नति के लिए अनिवार्य हैं फिर आखिर इसका इतना विरोध क्यूँ। गठबंधन सरकार ने जिस तरीके से यह प्रस्ताव पारित किया है उससे यह स्पष्ट होता है कि वे इन गंभीर मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं चाहते हैं। प्रकाश ने कहा कि देश में फैल रही कोरोना महामारी से बचाव सरकार की प्राथमिकता नहीं है बल्कि कुछ लोगों को तुष्टीकरण ही सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण
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