बैकुंठ-चतुर्दशी-व्रत-की-ये-पौराणिक-कथाएं-पढ़ने-सुनने-मात्र-से-होगी-लोक-प्राप्ति |Vaikunth Chaturdashi Katha Kahani Vrat Story बैकुंठ चतुर्दशी व्रत सुनना लोक प्राप्ति Hindi Latest News 


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बैकुंठ चतुर्दशी व्रत की ये पौराणिक कथाएं पढ़ने-सुनने मात्र से होगी बैकुंठ लोक की प्राप्ति

बैकुंठ चतुर्दशी व्रत की ये पौराणिक कथाएं पढ़ने-सुनने मात्र से होगी बैकुंठ लोक की प्राप्ति

पौराणिक मतानुसार एक बार भगवान विष्णु देवाधिदेव महादेव का पूजन करने के लिए काशी आए। वहां मणिकर्णिका घाट पर स्नान करके उन्होंने 1000 (एक हजार) स्वर्ण कमल पुष्पों से भगवान विश्वनाथ के पूजन का संकल्प किया। अभिषेक के बाद जब वे पूजन करने लगे तो शिवजी ने उनकी भक्ति की परीक्षा के उद्देश्य से एक कमल पुष्प कम कर दिया।
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