त्रिपुरा : सरकारी कर्मचारियों की एडहॉक पदोन्नति, नई पदोन्नति नीति मंजूर

त्रिपुरा : सरकारी कर्मचारियों की एडहॉक पदोन्नति, नई पदोन्नति नीति मंजूर
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अगरतला, 22 जून (हि.स.) । सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति 2015 से बंद है। सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण के मामले में अभी फैसला नहीं आया है। इस बीच राज्य मंत्रिमंडल ने त्रिपुरा के विकास के हित में ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंत्रिमंडल ने एडहॉक आधार पर पदोन्नति के लिए हरी झंडी दे दिया है। इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और वे राज्य के विकास पर अधिक ध्यान देंगे। इतना ही नहीं रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। कानून मंत्री रतन लाल नाथ ने मंगलवार की शाम सचिवालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कैबिनेट के फैसले का खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट के फैसले के तुरंत बाद एडहॉक पदोन्नति की अधिसूचना जारी कर दी गई। उन्होंने कहा, 2015 से पदोन्नति रोक दी गई है। क्योंकि, अभी तक प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं सुलझ पाया है। उनके मुताबिक सरकारी कर्मचारी बिना प्रमोशन के काम करने से अपना उत्साह खो रहे हैं। पदोन्नति नहीं होने से कई लोग लाभ से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा सरकार के सभी कर्मचारी राज्य के विकास कार्यों के सिपाही हैं। नतीजतन, त्रिपुरा सरकार को लगता है कि उन्हें वंचित करके राज्य का वास्तविक विकास संभव नहीं है। इसलिए, त्रिपुरा सरकार ने एक नई पदोन्नति नीति 2021 पेश की है। आज कैबिनेट ने उस नीति को मंजूरी दे दी है। उनके अनुसार नई नीति के अनुपालन में सरकारी कर्मचारियों को एडहॉक आधार पर पदोन्नत किया जाएगा। हालांकि, वह प्रमोशन वन टाइम होगा। उनके अनुसार, यदि एक ही कर्मचारी एक से ज्यादा पदोन्नति के हकदार हैं, तो भी उन्हें कई पदोन्नतियों का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति बाधित होने पर संबंधित विभाग वित्त विभाग की अनुमति के बिना आगे पदोन्नति कर सकता है। उन्होंने कहा कि उच्च पदों पर पदोन्नति शुरू होगी। इससे साफ है कि रोजगार के बहुत सारे अवसर पैदा होंगे। कानून मंत्री ने साफ शब्दों में कहा वन टाइम पदोन्नति स्थायी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा होने तक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से पदोन्नत किया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों को सभी वन टाइम वित्तीय लाभ मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि देश के किसी अन्य राज्य ने अभी तक इतना साहसिक फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा के बाद कई राज्यों में सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर मिलेंगे। उनका कहना है, सभी कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए यह निर्णय लेने से पहले महाधिवक्ता, कानून, वित्त, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दफ्तरों की राय ली गई है। उसके बाद कैबिनेट ने नई पदोन्नति नीति बनाने को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक की। उन्होंने इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। हिन्दुस्थान समाचार / संदीप / अरविंद

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