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निराश्रितों के शिक्षक ही नहीं, बने सहारा भी

निराश्रितों के शिक्षक ही नहीं, बने सहारा भी

अनाथ और निराश्रित बच्चों का भविष्य तलाश रहे राजधानी के एक राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक इन बच्चों के लिए केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि जीने का सहारा भी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत संसाधनों और प्रयासों से बंदी की कगार पर खड़े स्कूल को न सिर्फ आदर्श स्कूल के रूप में स्थापित कर दिया बल्कि इसी स्कूल में 133 निराश्रित बच्चों के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था भी की। ये शिक्षक हैं राजकीय पूर्व विद्यालय देहरा के प्रधानाध्यापक हुकम सिंह उनियाल। उनकी इस लगन और मेहनत को राष्ट्रपति अवॉर्ड से भी नवाजा जा रहा है। शिक्षक को भारतीय संस्कृति में भगवान से भी बड़ा दर्जा प्राप्त है। लेकिन
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