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समाचार खोज परीणाम: "Kumar Vishwas"

कुमार विश्वास और मनोज तिवारी के संग होली की हुल्लड़

जोगी जी वा, जोगी जी वा बिना कुछ रंग लगाए ये फाल्गुन लौट न जाए नदिया के पार फिल्म का यह गीत होली के खास गीतों में शुमार रहा है इसीलिए आज तक... क्लिक »



बम बम बोल रहा है काशीः मनोज तिवारी, रवि किशन और राजू श्रीवास्तव

होली में केवल प्रकृति और हमारा समाज ही नहीं हमारे भगवान भी अपने भक्तों की नजर में होली खेलते हैं शायद इसीलिए आजतक के होली कार्यक्रम में... क्लिक »

साहित्य आजतक में सितारों का महाकुंभ

["साहित्य आजतक का आज दूसरा दिन है हिंदी जगत के इस महामंच पर जावेद अख्तर, कुमार विश्वास, मामे खान के साथ करण जौहर लोगों से रूबरू होंगे पहले... क्लिक »

साहित्य आजतक के मंच पर सुर संगीत की महफिल, शामिल हो रहे हैं दिग्गज

दिल्ली के गलियारों में गुलाबी सर्दी अपने पांव फैलाने लगी है कोहरा थोड़ा ज्यादा है, लेकिन ये दिल्ली की तबीयत है इसी कोहरे की चादर तले इंदिरा... क्लिक »

कवि सम्मेलन में कवियों ने कुछ यूं बांधी समां

["u0026apos;साहित्य आज तकu0026apos; के पांचवें सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया इस सम्मेलन में मशहूर कवि कुमार विश्वास, मनोज मुंतशिर, मदन मोहन... क्लिक »

कुमार विश्वास बोले- हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते?

कवि और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्‍वास ने साहित्‍य आज तक, 2017 के मंच से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के साथ-साथ केजरीवाल पर भी निशाना... क्लिक »

साहित्य आजतक के मंच से कुमार विश्वास का केजरीवाल और आप पर हमला

वे बोले जो मार्ग चुना था ठीक नहीं था, बदल रहे हैंमुक्‍तवाह संकल्‍प गुना था ठीक नहीं था, बदल रहे हैंहमसे जो जयघोष सुना था ठीक नहीं था, बदल रहे... क्लिक »

कवि सम्मेलन: नए-नए थे तो हम भी बिल्कुल तुम्हारे जैसे थे...

उन्‍होंने गीत 'जो तुम भी करते मुझसे प्‍यार तो माझी गीतों को गाता, स्‍वप्‍न हमारे आज नहीं तो कल पूरे हो जाते आशाओं का महल हम तामीर कराते'... क्लिक »

साहित्य आजतक: कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से बांधा समां

कवि और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने 'साहित्य आजतक' के मंच में पहुंचते ही अपने परिचित अंदाज में सभी का अभिवादन किया कुमार... क्लिक »

कुमार का खु़मार, साहित्य आजतक के मंच पर भी बोलेगा नए संग्रह का जादू 18 अक्टूबर 2019

कुमार विश्‍वास की कविता को किसी भाष्‍य की जरूरत नहीं है वह एक सुगम लय की तरह मन में उतर जाती है मघई पान की तरह कंठ में घुल जाती है वह लाखों... क्लिक »