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केंद्र सरकार 24 घंटे में कोरोना की जानकारी के लिए स्थापित करे पोर्टल : सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार 24 घंटे में कोरोना की जानकारी के लिए स्थापित करे पोर्टल : सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार 24 घंटे में कोरोना की जानकारी के लिए स्थापित करे पोर्टल : सुप्रीम कोर्ट -कोरोना पर दायर याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगाने की केन्द्र की मांग भी ठुकराई नई दिल्ली, 31 मार्च (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार 24 घंटे के अंदर कोरोना की जानकारी के लिए पोर्टल स्थापित करे। चीफ जस्टिस एस.ए.

बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए ये आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न हाई कोर्ट में कोरोना पर दायर याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगाने की केन्द्र सरकार की मांग को ठुकरा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट अपने राज्य की समस्या को और बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि गरीब, बेसहारा, पलायन कर रहे लोगों के लिए बने कैंप की व्यवस्था के लिए स्वंयसेवकों को लगाया जाना चाहिए। इन कैंपों में बल प्रयोग या डराने धमकाने जैसी बात नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि शेल्टर में पर्याप्त पानी, भोजन, दवाइयां और बेड इत्यादि उपलब्ध होने चाहिए। तब तुषार मेहता ने कहा कि इस समय एक वर्ष के लिए खाद्यान उपलब्ध है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि जिन लोगों को कैंप में रखा गया है उन सभी को भोजन और चिकित्सा सहायता का ध्यान रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि कैंप में रखे गए लोगों की चिंता कम करने के लिए सभी धर्म संप्रदाय के नेताओं और धर्म गुरुओं की सहायता ली जाए। इससे उनमें पैनिक कम किया जा सकेगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि पैनिक, वायरस से अधिक खतरनाक है। यह कोरोना से अधिक ज़िंदगी तबाह कर सकता है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 22 लाख 88 हजार जरूरतमंद लोगों को खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें दिहाड़ी मजदूर, पलायन करते लोग और जरूरतमंद शामिल हैं। फिलहाल पलायन रुक गई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि कोरोना को लेकर फैलायी जा रही फेक न्यूज़ एक बड़ी समस्या है। तब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि इनक्युबेशन पीरियड के इन 28 दिनों में तीन लाख 48 हजार लोगों की निगरानी की जा रही है। तुषार मेहता ने कहा कि पांच जनवरी को एक व्यक्ति विदेश से आया जो कोरोना से संक्रमित था। केंद्र सरकार 17 जनवरी से ही इससे निपटने में लग गई थी। हमने कई देशों से आगे बढ़कर काम किया है। हमने दूसरे देशों से आ रहे लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग पहले ही शुरु कर दी थी। उन सभी को जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दिए उन्हें क्वारेंटाइन सेंटर में भेज दिया गया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि जिन लोगों को कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन्हें जाने दिया जाए। तब तुषार मेहता ने कहा कि हमने उन्हें हेल्पलाइन नंबर दिया और कहा कि अगर कोई लक्षण होता है तो इन नंबरों पर संपर्क करें। मेहता ने कहा कि दुनिया भर में कोरोना से निपटने का कोई उपाय नहीं है। जब इस वायरस का पता चला तो हमारे पास केवल पुणे में एक लैब था। जनवरी में इस एक लैब के बाद आज देश भर में 118 लैब हैं, जिनमें 15 हजार रोजाना टेस्ट हो सकते हैं। मेहता ने कहा कि हमारी तैयारियों की बदौलत ही कोरोना का प्रसार रोकने में हम सफल हुए हैं। 22 मार्च से फ्लाइट रोक दिए गए हैं। केंद्र सरकार कोरोना से निपटने के लिए एक स्पेशल युनिट के गठन की तैयारी कर रही है। इस यूनिट में चिकित्सा विशेषज्ञों और वरिष्ठ डॉक्टर शामिल होंगे, जो लोगों के सवालों का जवाब दे सकेंगे। चीफ जस्टिस ने तुषार मेहता से कहा कि आपकी रिपोर्ट में कहा गया है कि आपने एक व्हाट्सएप चैटबॉक्स लॉन्च किया है, जिसमें लोगों के सवालों का जवाब दिया जा सके। क्या यह काम कर रहा है। तब तुषार मेहता ने कहा कि इसका ट्रायल चल रहा है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आप प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उसे डीडी और दूसरे चैनल्स पर प्रसारित क्यों नहीं करवाते। जस्टिस एल. नागेश्वर राव ने कहा कि फेक न्यूज के प्रसार को रोकने के लिए फेसबुक, ट्विटर, टिकटॉक का इस्तेमाल करें। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आप फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं। आपको उन्हें दंड देने का अधिकार है। तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से पूछा है कि किन अस्पतालों में बेड उपलब्ध हैं ताकि उन्हें कोरोना वायरस के मरीजों के लिए रिजर्व रखा जा सके। तुषार मेहता ने कहा कि पिछली जनगणना के मुताबिक करीब 4.14 करोड़ लोग काम के लिए पलायन किए हैं। अब वे कोरोना के भय से वापस जा रहे हैं । मेहता ने कहा कि शहरों से गांवों में पलायन खत्म होना चाहिए ताकि कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सके। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अंतर्राज्यीय पलायन रोकने का निर्देश दिया है। आज कोई रोड पर नहीं है। जो भी रोड पर था उसे शेल्टर होम में भेज दिया गया। छह लाख 63 हजार लोगों को शेल्टर होम में जगह दी गई है। चीफ जस्टिस ने तुषार मेहता से कहा कि कोरोना पर केरल के कासरगोड के एक सांसद और पश्चिम बंगाल के एक सांसद ने याचिका दायर की है। हमने उसे लिस्ट नहीं किया है लेकिन उनके सुझाव अच्छे हैं। चीफ जस्टिस ने मेहता से उनकी याचिकाओं पर गौर करने को कहा। तब मेहता ने काह कि अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राज्यों को निर्देश दे कि उसे दिशानिर्देशों का पालन करें। तब जस्टिस एल नागेश्वर राव ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम में ऐसे प्रावधान हैं। इस पर विशेष आदेश देने की जरुरत नहीं है। इस मामले में एक और याचिकाकर्ता की ओर से वकील रश्मि बंसल ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो रिपोर्ट दी गई है उसमें सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। शेल्टर में भी काफी भीड़भाड़ है। रश्मि बंसल ने बरेली में पलायन करनेवाले कुछ मजदूरों पर केमिकल छिड़कने की शिकायत की । पिछले 30 मार्च को केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं। चीफ जस्टिस एस ए बोब्डे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने कहा था कि हम तुरंत कोई निर्देश देकर भ्रम नहीं फैलाना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा था कि घबराकर भाग रहे लोगों को काउंसिलिंग की जरुरत है। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि डर वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। तब तुषार मेहता ने कहा कि मैं अनुरोध करुंगा कि ऐसा कोई संदेश न दिया जाए कि सुप्रीम कोर्ट पलायन को आसान बनाकर बढ़ावा दे रहा है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में कहा है कि 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद प्रवासी मजदूरों को बिना घर और भोजन के छोड़ दिया गया। ये मजदूर देश भर में अपने-अपने इलाके में फंसे हुए हैं। उनके लिए परिवहन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। याचिका में कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों के पलायन की खबरें मीडिया में चलाई जा रही हैं। याचिका में कहा गया है कि जो प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर रवाना हुए हैं उन्हें नजदीक के शेल्टर होम में शिफ्ट करने और भोजन, पानी और दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं। याचिका में कहा गया है कि इन प्रवासी मजदूरों के संविधान की धारा 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि इन प्रवासी मजदूरों पर कोरोना वायरस के वाहक होने का भी धब्बा लगेगा और उन्हें अपने गांवों में भी अपनाया नहीं जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत
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