ओलंपिक टीम से बाहर किए जाने पर मानसिक रूप से पीड़ित थी : चिंकी

 ओलंपिक टीम से बाहर किए जाने पर मानसिक रूप से पीड़ित थी : चिंकी
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नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। कोटा हासिल करने के बावजूद टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय टीम से निकाली गईं महिला पिस्टल निशानेबाज चिंकी यादव को मानसिक पीड़ा झेलना पड़ा। चिंकी ने भोपाल से आईएएनएस से कहा, ओलंपिक टीम से बाहर किए जाने के बाद मुझे जो मानसिक पीड़ा हुई, उसे बयां करना मुश्किल है। मार्च (2021) में नई दिल्ली विश्व कप में मेरे स्वर्ण पदक जीतने के प्रदर्शन की अनदेखी हुई। लेकिन माता-पिता के समर्थन से मुझे डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिली। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने पिछले महीने ही पिस्टल शूटर चिंकी को टोकियो ओलंपिक के लिए घोषित टीम से बाहर कर दिया था और उनकी जगह राइफल शूटर अंजुम मौदगिल को दे दिया था क्योंकि कोटा देश के लिए है न कि व्यक्तिगत शूटर के लिए। एनआरएआई ने 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में दो बेस्ट निशानेबाजों में शामिल चिंकी को नहीं चुना और उनके स्थान पर मनु बेकर और राही सरनोबत को चुना। एक देश एक स्पर्धा में अधिकतम केवल दो ही निशानेबाजों को उतार सकता है। मौदगिल का मुकाबला महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में होगा। चिंकी ने कहा कि वह एनआरएआई की नीति पर बहस नहीं करना चाहती, लेकिन उन्हें लगता है कि मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर उनको जगह मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा, मैं दोहा में 2019 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में ओलंपिक बर्थ जीतने के बाद जापान में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्साहित थी। लेकिन 17 महीने बाद, मेरी उत्साह खत्म हो गया क्योंकि मुझे टोक्यो ओलंपिक खेलों की टीम से हटा दिया गया। मुझे पहले बताया जाना चाहिए था कि मैं ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने के योग्य नहीं हूं। - -आईएएनएस ईजेडए/जेएनएस

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