सोनभद्र उम्भा व सपही में भूमि कब्जाने के दोषियों पर एक करोड़ का जुर्माना Hindi Latest News 

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सोनभद्र: उम्भा व सपही में भूमि कब्जाने के दोषियों पर एक करोड़ का जुर्माना

सोनभद्र: उम्भा व सपही में भूमि कब्जाने के दोषियों पर एक करोड़ का जुर्माना

सोनभद्र: उम्भा व सपही में भूमि कब्जाने के दोषियों पर एक करोड़ का जुर्माना लखनऊ, 24 मार्च(हि.स.)। कोरोना से युद्ध के बीच के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जंग भी जारी है। मुख्यमंत्री ने जनपद सोनभद्र के ग्राम उम्भा व सपही में धोखाधड़ी कर भूमि कब्जा करने के दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई तय कर दिया

है। सीएम योगी ने सोनभद्र के उंभा केस में ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने के आरोपी अधिकारियों के ख़िलाफ़ 01 करोड़ से ज़्यादा का जुर्माना लगा दिया गया है। साथ ही जिन विभागीय अधिकारियों की भूमिका इस अवैध कब्जे में रही है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि सोनभद्र के उम्भा मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो दोषियों से 01 करोड़, नौ लाख, नब्बे हजार 26 रूपये (मय ब्याज) की वसूली होगी। इसके साथ ही दायित्व निर्वहन में उदासीन रहे तत्कालीन जिलाधिकारी, एएसपी सहित 21 के विरुद्ध होगी विभागीय कार्रवाई होगी। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम व तहसीलदार, राबर्ट्सगंज सहित 22 अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप प्रमाणित पाए जाने पर आरोप पत्र दिया जाएगा। इस मामले में आशा मिश्रा द्वारा जमीन बिक्री कर रूपये 50 लाख, 64 रूपये तथा विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी द्वारा जमीन बिक्री कर रूपये 59 लाख,89 हजार 962 रूपये अर्थात कुल रूपये एक करोड़, नौ लाख, नब्बे हजार छब्बीस रूपये का लाभ अर्जित किया गया है। इस धनराशि को आशा मिश्रा व विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी से मय ब्याज के नियमानुसार वसूली किये जाने की संस्तुति की गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 17 जुलाई को सोनभद्र में जमीन विवाद में 10 लोगों की मौत हुई थी। तब दर्जन भर से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। डीएम और एसपी को हटा दिया गया था। उभ्भा मामले में प्रमुख सचिव राजस्व रेणुका कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तत्कालीन उपजिलाधिकारी घोरावल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। क्षेत्राधिकारी घोरावल के खिलाफ भी सरकार ने कठोर कदम उठाए और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए उन पर गुंडा एक्ट व आपराधिक वाद दर्ज करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इस मामले में सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने उम्मा में हुए नरसंहार के बाद विवादित जमीन को लेकर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे। उन जमीनों को लेकर हुई जांच में ये पाया गया कि कांग्रेस की सरकार के वक्त कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने फर्जी तरीके से सहकारी समितियां बनाकर आदिवासियों और गरीबों की जमीनों पर कब्जा कर लिया था। उसी क्रम में ये कार्रवाई हुई है। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश
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