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सोमजी की मूर्ति हिंसात्मक विचारों के विरूद्ध सीख लेने के लिए प्रचारित की जावेगी - सुन्दरराज पी.

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जगदलपुर, 27 अप्रैल (हि.स.)। बस्तर संभाग के कांकेर के आमाबेड़ा थाना क्षेत्रांतर्गत चुकलापाल के पास 18 फरवरी 2021 को सुरक्षा बल कोक्षति पहुंचाने की नीयत से नक्सलियों के उत्तर बस्तर डिवीजन के कमेटी सदस्य सोमजी उर्फ सहदेव वेदड़ा द्वारा आईईडी लगाया गया था । आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर स्वयं नक्सली सोमजी उर्फ सहदेव वेदड़ा की ही मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। ग्राम आलदण्ड में परिजन एवं ग्रामीण द्वारा स्थापित की गईसोमजी की मूर्ति क्षेत्र की जनता को हमेशा बाहरी माओवादी नेतृत्व की स्थानीय आदिवासी युवा एवं युवतियों के विरूद्ध रची जा रही साजिश को याद दिलाएगा।साथ-साथ हिंसात्मक विचारों के परिणाम दर्दनाक एवं दुखद होने का संदेश भी समाज को देता रहेगा। बस्तरआईजी सुन्दरराज पी. ने बताया कि ग्राम आलदण्ड में स्थापित की गई सोमजी उर्फ मनीराम की मूर्ति को ध्वस्त नही किया जाकर उस स्थान को हिंसा एवं नकारात्मक विचार के विरूद्ध सीख लेने की पाठशाला के रूप में प्रचारित किया जायेगा । बस्तर आईजी सुन्दरराज पी. ने बताया कि सोमजीउर्फ सहदेव वेदड़ा के गृह ग्राम आलदण्ड थाना छोटे बेठिया जिला कांकेर में उनकी मूर्ति स्थापित करने के संबंध में परिजन एवं स्थानीय पुलिस से ग्रामीणों द्वारा संपर्क किया गया है । परिजन एवं ग्रामीणों द्वारा अवगत कराया गया कि सोमजी का घर का नाम मनीराम है, इसका बचपन गांव के अन्य बच्चों जैसे खेलते-कूदते एवं पढ़ते बीता है तथा इस दौरान वर्ष 2004 में उत्तर बस्तर डिवीजन के सीपीआईमाओवादी कैडर सुजाता, ललिता एवं रामधेर द्वारा 14 वर्ष की उम्र में जबरन माओवादी संगठन में भर्ती किया जाकर उसके हाथ में बंदूक थमा दिया गया। आंध्रप्रदेश,तेलंगाना एवं महाराष्ट्र की बाहरी माओवादी कैडर की साजिश की चाल में फंसकर मनीराम वेदड़ा, सोमजी का स्वरूप लेकर विगत 17 वर्षों से कई निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की हत्या करना,आगजनी, तोडफ़ोड़ एवं अन्य विनाशकारी गतिविधियों में शामिल रहा। परिजन एवं ग्रामीणों के लोगों द्वारा हिंसा छोड़कर घर वापस आने के लिए अनेक बार गुहार लगाने के बावजूद भी बाहरी माओवादी कैडर के चंगुल में फंसे हुए सोमजी द्वारा लगातार नकारात्मक एवं हिंसात्मक कार्यों में लगा रहा। अंतत: स्वयं हिंसा का शिकार होकर 18 फरवरी 2021 को दर्दनाक मृत्यु हो गई। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे