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नोटबंदी के बाद चुनावों की सरकारी फंडिंग! क्या भारत में है मुमकिन?

नोटबंदी के बाद चुनावों की सरकारी फंडिंग! क्या भारत में है मुमकिन?

नोटबंदी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी चुनावों की सरकारी फंडिंग पर जोर दे सकते हैं हालांकि चुनाव आयोग और लॉ कमीशन का कहना है कि अगर राजनीति में अपराधीकरण रोकने और चंदे के मामले में पार्टियों को और ज्यादा पारदर्शी बनाए बिना सरकारी फंडिंग के सीमित नतीजे आएंगे चुनाव आयोग का मानना है कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की ओर से किए जाने वाले बेहिसाब खर्चे पर रोक लगाने के लिए चुनावों के लिए पूरी तरह सरकारी खर्च करने का मकसद तबतक पूरा नहीं होगा जब तक अपराधीकरण और राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन पर रोक न लगाई जाए पीएम मोदी ने देशभर में राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने
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