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अनसुनी रह जाती है जिनकी आवाज

अनसुनी रह जाती है जिनकी आवाज

जनतंत्र में कुछ आवाजें हैं जो ज्यादा सुनाई देती हैं। महानगर और शहर के बड़े तबके की आवाज तो जनतांत्रिक विमर्श में सुनी ही जाती है कस्बों राजमार्गों और मुख्य सड़कों के किनारे के गांवों की आवाज भी कई बार इसमें दर्ज हो जाती है। लेकिन जो अंतरे-कोने में पडे़ हैं जो नदियों के किनारे के गांव हैं जो दियारे में बसे गांव हैं जो पहाड़ों की तलहटियों में और जंगलों के किनारे रहने वाले सामाजिक समुदाय हैं उनकी आवाजें चुनावी लोकतंत्र में प्राय: अनसुनी रह जाती हैं। चुनाव से वे क्या चाहते हैं? चुनाव से बनने वाली सरकार से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं? सरकार से उनकी मांग क्या है? उनके लिए चुनाव का क्या
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