वीरपुर के युवा किसान ने की लाल भिंडी की जैविक खेती

वीरपुर के युवा किसान ने की लाल भिंडी की जैविक खेती
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- किसान जगदीश का दावा, गोमूत्र और खाद की प्राकृतिक खेती की देन है तेल रहित लाल भिंडी राजकोट/अहमदाबाद, 11 जून (हि.स.)। गुजरात के किसान लगातार नए-नए प्रयोग कर कृषि क्षेत्र में अद्भुत कारनामे दिखा चुकेे हैं। अब एक किसान ने लाल भिंडी की खेती का सफल प्रयोग किया है। राजकोट जिले के वीरपुर तहसील के युवा किसान जगदीशभाई छोटूभाई वालंद ने ग्वार, चोली, बैंगन आदि सब्जियों के साथ-साथ अबकी बार लाल भिंडी की खेती की है। इस भिंडी के बीज उन्हें लखनऊ (यूपी) के एक मित्र से प्राप्त हुए थे। वह अपनी प्रारंभिक सफलता को लेकर बहुत उत्साहित हैं। उनका कहना है कि अभी बुनाई शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि लाल भिंडी में हरे भिंडी की तरह कांटेदार फर नहीं होता है। इसकी अलावा फसल में चूसने वाले कीट और कैटरपिलर की संभावना कम ही होती है। इसलिए कीटनाशक की लागत भी बहुत कम है। यदि वर्तमान समय में पारंपरिक खेती के बजाय बागवानी या सब्जी की खेती की जाए तो अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वीरपुर तहसील के विस्तार अधिकारी और बागवानी विभाग से उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहता है। हमें जैविक खेती की ओर बढ़ना बहुत जरूरी है। प्राकृतिक खेती के संदेश के साथ जगदीश भाई कहते हैं कि वे देसी गायों के गोमूत्र और गोबर की खाद से सभी सब्जियां लाभदायक होती हैं। उन्होंने बताया कि जैविक लाल भिंडी स्वास्थ्यवर्धक है। जगदीश ने राज्य में लाल भिंडी की खेती करके अपनी अलग पहचान बना ली। हिन्दुस्थान समाचार/हर्ष शाह