मेडिकल के प्रथम वर्ष के छात्रों से अगले साढ़े तीन साल की एकमुश्त फीस लेना गलत : हाईकोर्ट

मेडिकल के प्रथम वर्ष के छात्रों से अगले साढ़े तीन साल की एकमुश्त फीस लेना गलत : हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट के फैसले से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को लगा जोरदार झटका जोधपुर, 31 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को जोरदार झटका दिया है। हाईकोर्ट ने नया प्रवेश लेने वाले छात्रों से प्रथम वर्ष के अलावा ली जा रही साढ़े तीन साल की फीस की बैंक गारंटी जमा कराने के फरमान को अवैध करार दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की वसूली नहीं की जा सकती है। बीच में पढ़ाई छोड़कर जाने की आशंका वाले कुछेक मामलों में ही ऐसा किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिसम्बर में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के फरमान पर रोक लगा दी थी। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए उसे पूरे मामले की सुनवाई नए सिरे से करने का आदेश दिया था। इस मामले को सोमवार को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस संगीत राज लोढ़ा और जस्टिस रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने कहा कि प्रत्येक छात्र से इस तरह प्रथम वर्ष के अलावा अगले साढ़े तीन वर्ष की फीस की बैंक गारंटी नहीं ली जा सकती है। कुछेक मामलों में यदि ऐसा लगे कि अमुक छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ कर जा सकता है तो उससे कॉलेज प्रशासन अगले साढ़े तीन साल की फीस के बराबर राशि का का बॉन्ड ले सकता है। यदि कॉलेज ऐसा करता है तो उसे बैंकों में फिक्स डिपॉजिट पर देय ब्याज के बराबर राशि छात्र को देनी होगी या उसकी फीस में समाहित करनी होगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह इस आदेश का पालन सुनिश्चित करे। हाईकोर्ट के इस निर्णय से प्राइवेट मेडिकल कॉलेज संचालकों को झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग सालाना फीस ली जाती है। सबसे कम फीस 15 लाख रुपये सालाना है। कुछ मेडिकल कॉलेजों ने प्रथम वर्ष की फीस जमा कराने के साथ ही दो वर्ष की फीस अग्रिम जमा कराने का आदेश निकाला। बाद में इसका विरोध होते देख सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने नया प्रवेश लेने वाले छात्रों से प्रथम वर्ष की फीस के अलावा साढ़े तीन साल की फीस के बराबर राशि की बैंक गारंटी देने को कहा। इस तरह अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। उन्हें 52.50 लाख रुपये या इससे अधिक की बैंक गारंटी जमा करवानी थी। ऐसे करने की मशक्कत के साथ ही गांरटी के बदले बैंक को देय भुगतान से उनकी जेब ढीली होने वाली थी। हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है। हिन्दुस्थान समाचार/ सतीश / ईश्वर

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