वैक्सीन की कीमत केन्द्र और राज्य सरकार के अलावा निजी अस्पतालों के लिए अलग-अलग क्यों: हाईकोर्ट

वैक्सीन की कीमत केन्द्र और राज्य सरकार के अलावा निजी अस्पतालों के लिए अलग-अलग क्यों: हाईकोर्ट
why-the-price-of-vaccines-is-different-for-private-hospitals-other-than-the-central-and-state-government-high-court

जयपुर, 29 अप्रैल (हि.स.) । राजस्थान हाईकोर्ट ने कोरोना वैक्सीन की कीमत केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और निजी अस्पतालों के लिए अलग-अलग रखने एवं कंपनियों की ओर से मुनाफा वसूली करने पर केन्द्र और राज्य सरकार सहित सीरम इंस्टीट्यूट व भारत बायोटेक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश मनोज व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा की जनहित याचिका पर दिए। मामले में अदालत 12 मई को आगामी सुनवाई करेगी। याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता अभय भंडारी ने अदालत को बताया की कोरोना वैक्सीन के नाम पर इसकी निर्माता कंपनियां मुनाफा वसूल रही है। एक ही वैक्सीन की कीमत केन्द्र सरकार के लिए अलग और राज्य सरकार के लिए अलग तय की गई है। वहीं निजी अस्पतालों को कई गुणा अधिक कीमत पर वैक्सीन लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जबकि केन्द्र सरकार को शक्ति है कि वह वैक्सीन निर्माताओं को वैक्सीन की कीमत कम और एक समान रखने के लिए पाबंद कर सकती है। याचिका में कहा गया की सीरम इंस्टीट्यूट अपनी वैक्सीन कोविशील्ड केन्द्र सरकार को 150 रुपए, राज्य सरकार को 400 रुपए और निजी अस्पतालों को 600 रुपए में देना तय किया है। इसी तरह भारत बायोटेक अपनी कोवैक्सीन के 600 रुपए और 1200 रूपए तक लेने का निर्णय किया है। यह कीमत विश्व मे सबसे अधिक है। नियमानुसार कोई भी निर्माता अधिकतम 16 फीसदी तक ही मुनाफा कमा सकता है। जबकि ये कंपनियां 800 फीसदी तक मुनाफा वसूल रही हैं। याचिका में कहा गया की पीएम केयर्स फंड में गत 9 जुलाई तक 30 अरब रुपए से अधिक जमा हो चुका है। इसके अलावा केन्द्र सरकार ने इस बार बजट में वैक्सीनेशन को लेकर 35 हजार करोड रुपए का प्रावधान किया है। ऐसे में केन्द्र सरकार को पूरे देश में फ्री वैक्सीनेशन ड्राइव चलाना चाहिए। इसके साथ ही वैक्सीन निर्माताओं को वैक्सीन की न्यूनतम कीमत ही वसूलने के निर्देश दिए जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों व वैक्सीन निर्माताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हिन्दुस्थान समाचार/पारीक/ईश्वर