डब्ल्यूबीएसएससी घोटाला: सुनवाई से अलग हुए एक और जज

 डब्ल्यूबीएसएससी घोटाला: सुनवाई से अलग हुए एक और जज
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कोलकाता, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश द्वारा मामले से खुद को अलग करने के बाद पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा भर्ती में अनियमितताओं से संबंधित मामलों की सुनवाई पर अनिश्चितता मंगलवार को भी जारी रही। सोमवार को जस्टिस हरीश टंडन मामलों से अलग हो गए। तदनुसार मामलों को न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, मंगलवार को बागची ने न्यायमूर्ति टंडन जैसे व्यक्तिगत आधारों का हवाला देते हुए अपने फैसले के पीछे का कारण बताया। दरअसल, जस्टिस टंडन की बेंच से जस्टिस बागची की बेंच को केस ट्रांसफर करने में सोमवार से ही काफी पेचीदगियां देखने में आ रही थीं। न्यायमूर्ति टंडन की ओर से सोमवार दोपहर को सुनवाई से अलग होने के बाद, नई पीठ आवंटित करने के फैसले के साथ मामले कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव के पास वापस चले गए। पहले जस्टिस श्रीवास्तव ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के आधार पर जस्टिस टी. एस. शिवगनम को मामले अलॉट करने का फैसला किया था। उन्होंने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए सुनवाई में असमर्थता व्यक्त की थी। तब न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने मामलों को न्यायमूर्ति सौमेन सेन की खंडपीठ को आवंटित करने का फैसला किया। हालांकि, न्यायमूर्ति सेन ने भी इस मामले में अपनी असमर्थता व्यक्त की। अंत में, मुख्य न्यायाधीश ने मामलों को न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति बिवास पटनायक की खंडपीठ को आवंटित किया और यह निर्णय लिया गया कि उक्त पीठ मंगलवार सुबह मामलों की सुनवाई करेगी। हालांकि, मंगलवार सुबह न्यायमूर्ति बागची ने मामलों की सुनवाई से अलग होने के अपने फैसले की घोषणा की। बता दें कि 25 मार्च को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल न्यायाधीश पीठ ने डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व सलाहकार एसपी सिन्हा को अपनी संपत्ति के विवरण का खुलासा करते हुए अदालत में एक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था। सिन्हा ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ सामंत की खंडपीठ में अपील की। उक्त खंडपीठ ने हालांकि एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन सिन्हा को वही हलफनामा सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने खंडपीठ की इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और शिकायत की कि एक तरह से एकल पीठ के हाथ बंधे हुए हैं। न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने कहा, मुझे यह कहते हुए खेद है - अपील अदालत द्वारा व्यक्त किए गए कारण के लिए उच्चतम स्तर का दोहरा मापदंड है। लेकिन न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए, मुझे इस तरह के आदेश को स्वीकार करना होगा। उस घटनाक्रम के बाद खंडपीठ के दो न्यायाधीशों, पहले न्यायमूर्ति हरीश टंडन और फिर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। --आईएएनएस एकेके/एएनएम

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