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विस चुनाव : सांप्रदायिक बयानों के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटा एआईयूडीएफ

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गुवाहाटी, 03 अप्रैल (हि.स.)। असम विधानसभा चुनाव के तीसरे एवं अंतिम चरण के मतदान के समाप्त होने से पहले; नेताओं के जहरीले बयानों ने चुनाव प्रचार को बेहद आक्रामक बना दिया है। एआईयूडीएफ के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल के पुत्र एवं विधायक अब्दुर रहीम अजमल के बयान से राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस-नीत महागठबंधन में शामिल एआईयूडीए सांप्रदायिक बयान के बल पर शांति एवं सद्भाव को तार-तार करते हुए मतदाताओं को लुभाने में जुट गयी है। एआईयूडीएफ के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने हाल ही में दावा किया था कि महागठबंधन सरकार की चाभी उनके हाथों में होगी। महागठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल में किसे मंत्री बनाया जाएगा, वे तय करेंगे। वहीं अजमल और उनकी पार्टी दूसरे चरण का चुनाव समाप्त होने के बाद और आक्रामक हो गई है। अजमल के साथ-साथ उनके विधायक पुत्र अब्दुर रहीम ने शुक्रवार को भवानीपुर में चुनावी जनसभा में सांप्रदायिक बयान देकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस बार असम में दाढ़ी, टोपी, लुंगी वाली सरकार का गठन होगा। हम एनआरसी से मुक्ति चाहते हैं। इसलिए इस बार के चुनाव में हमने पूरे असम में यह नारा दिया है कि भाजपा हटाओ असम बचाओ। उन्होंने कहा कि एक लाठी को तोड़ना आसान है, लेकिन इस बार सात लाठी एकजुट हुए हैं, जिसके चलते भाजपा इसे तोड़ नहीं सकती है। उन्होंने कहा, महागठबंधन की सरकार के बनने पर सिंदूर धारण करने वाली महिलाओं को जो सम्मान मिलेगा, उतना ही सम्मान एक बुर्का पहनने वाली महिला को भी मिलेगा। एक साधु को जितना सम्मान मिलेगा, उतना ही सम्मान मौलवी को भी मिलेगा। जैसा सम्मान दाड़ी-टोपी वाले को मिलेगा, उतना ही सम्मान धोती पहनने वाले को भी मिलेगा। एआईयूडीएफ अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि असम में महागठबंधन की सरकार इस बार बननी निश्चित है। राज्य में तीन चरणों के चुनाव में अजमल ने कहा कि पहले चरण के मतदान वाले ऊपरी असम में पहले भाजपा थी, लेकिन इस बार के चुनाव में महागठबंधन अधिक सीटें हासिल करेगा। जबकि, दूसरे चरण में हमें काफी सीटें मिलेंगी। उन्होंने दावा किया कि छह अप्रैल को होने वाले तीसरे एवं अंतिम चरण के मतदान में हमें 95 फीसदी वोट मिलेंगे। उन्होंने राइजर दल और असम जातीय परिषद की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये दोनों पार्टियां भाजपा को जीत दिलाने का काम कर रही हैं। दोनों पार्टियां अल्पसंख्यक समुदाय को कुछ सीटें देकर वोट बांटकर भाजपा को जीत हासिल करने का मौका दे रही हैं। कुल मिलाकर अजमल और अजमल के बेटे पूरे चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक बयानों के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। हिन्दुस्थान समाचार/ अरविंद