उपराष्ट्रपति ने बिस्मिल की जयंती पर स्वाधीनता के लिए उनके संघर्ष को किया याद

उपराष्ट्रपति ने बिस्मिल की जयंती पर स्वाधीनता के लिए उनके संघर्ष को किया याद
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नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए उनके संघर्ष को याद किया। उपराष्ट्रपति नायडू ने ट्विटर पर बिस्मिल की कविता को साझा करते हुए लिखा, "ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो.. वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले, वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो.." नायडू ने कहा, अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल जी की जन्म जयंती पर राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए आपके संघर्ष को कृतज्ञ प्रणाम, आपकी राष्ट्रभक्ति को प्रणाम! उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 11 जून, 1897 को जन्मे! पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन जाने-माने भारतीय आंदोलनकारियों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। उन्होंने 19 वर्ष की आयु से 'बिस्मिल' उपनाम से उर्दू और हिन्दी में देशभक्ति की सशक्त कविताएं लिखनी आरंभ कर दी। उन्होंने भगत सिंह और चन्द्र शेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों सहित हिन्दु्स्तांन रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया और 1918 में इसमें मैनपुरी षडयंत्र और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रदर्शन करने के लिए अशफाक उल्लाह खान तथा रोशन सिंह के साथ 1925 के काकोरी कांड में भाग लिया। काकोरी कांड में हाथ होने के कारण उन्हें मात्र 30 वर्ष की आयु में 19 दिसम्बर, 1927 को गोरखपुर जेल में फांसी दे दी गई। जब वे जेल में थे तब उन्होंने 'मेरा रंग दे बसंती चोला' और 'सरफरोशी की तमन्ना' लिखे जो स्वतंत्रता सेनानियों का गान बन गए। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील