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उत्कल विश्वविद्यालय के दीक्षांत कार्यक्रम में शामिल हुए उपराष्ट्रपति

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भुवनेश्वर, 03 अप्रैल (हि.स.)। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि हमें परिपूर्ण व सृजनशील व्यक्तियों के निर्माण के लिए तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों की महान भारतीय परंपरा को पुनः स्थापित करना होगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे चुनौती को स्वीकार करके परिवर्तन के वाहक बने। वह अपने उद्देश्य का लक्ष्य निर्धारण करने के साथ ही देश का भविष्य बने। उपराष्ट्रपति नायडू शनिवार को उत्कल विश्वविद्यालय के 50वें दीक्षांत समारोह में शामिल होकर छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ओडिशा का इतिहास समृद्ध व प्रेरणादायी है। यह महान कलिंग भूमि सम्राट अशोक को शांति की शिक्षा देने में सफल रहा था। इसके बाद अशोक ने धर्म विजय नीति का अनुसरण किया था। उन्होंने कहा कि ओडिशा के राजा दक्षिण पूर्व एशिया के साथ सांस्कृतिक संबंधों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करते हुए हिंदू वह बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार करवाया। कलिंग साम्राज्य अपनी गौरवमयी समुद्री परंपरा के लिए विख्यात है। यहां से साधव दूर दराज के देशों में समुद्र के रास्ते व्यापार करने के लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि आज भी यहां के लोग साधवों के प्राचीन वाणिज्य परंपरा व स्मृति में बाली यात्रा का आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों से प्रेरणा लेकर उद्यमिता व नव सृजन की रूचि रखने वाले युवा तैयार होने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जिस मूल्य व प्रशिक्षण उन्हें मिला है उसके द्वारा आत्मविश्वास के साथ दुनिया का मुकाबला कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है आत्मविश्वास के साथ विश्व का मुकाबला करो। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है यह चरित्र निर्माण एवं 21वीं सदी में दक्षता के विकास के साथ-साथ एक स्वयं संपूर्ण व्यक्ति बढ़ने के लिए इसका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि ओडिशा का एक और विशेषता है कि यहां पर अधिक संख्या में जनजाति लोग रहते हैं। यहां पर 62 प्रकार के जनजाति समूह रहते हैं ओडिशा की कुल जनसंख्या के 23% जनजाति हैं। इसलिए जनजाति समुदाय के विकास व कल्याण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजाति वर्ग के विकास के लिए सकारात्मक दिशा में ध्यान केंद्रित करने के लिए हमें कार्य करना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में इस बात को शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि ओडिशा के लिए एक और महत्वपूर्ण विषय है आपदा प्रबंध राज्य नियमित रूप से बाढ़ तूफान सूखा जैसे प्राकृतिक विपदा द्वारा छतिग्रस्त हुआ है इसलिए हमारी शिक्षा के प्रारंभ काल से आपदा प्रशासन को भी इसमें शामिल करने की आवश्यकता है। हिन्दुस्थान समाचार/समन्वय़/सुनीत