नई शिक्षा नीति वैश्विक मानवता के लिए प्रासंगिक : उप राष्ट्रपति
नई शिक्षा नीति वैश्विक मानवता के लिए प्रासंगिक : उप राष्ट्रपति
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नई शिक्षा नीति वैश्विक मानवता के लिए प्रासंगिक : उप राष्ट्रपति

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नई दिल्ली, 30 जुलाई (हि.स.)। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नई शिक्षा नीति को अच्छी शिक्षा को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण कदम करार देते हुए कहा कि यह नीति मूलतः भारतीय होते हुए भी वैश्विक मानवता के लिए प्रासंगिक है। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह संतोष का विषय है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू करने का फैसला किया है। नई शिक्षा नीति बच्चों और युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति मूलतः विद्यार्थी केंद्रित है, जिसमें शिक्षा को संपूर्णता में देखा गया है। इस में आवश्यक लचीलापन भी है, जिससे भारत एक जीवंत नॉलेज सोसायटी के रूप में उभरेगा। नई शिक्षा नीति का मूल भारतीय समाज में ही निहित है। साथ ही विश्व भर से श्रेष्ठ विचारों और शिक्षा पद्धतियों को भी स्वीकार किया गया है। वेंकैया ने कहा, देश की विविधता और स्थानीय संदर्भों को शिक्षा में स्थान देने के लिए इसमें मातृ भाषा तथा अन्य भाषाओं को सीखने पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही भारत की प्राचीन भाषाओं के महत्व को भी स्वीकार किया गया है। इससे विद्यार्थियों में विहंगम विश्व दृष्टि विकसित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में नैतिक और मानवीय मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे विद्यार्थी भविष्य के एक प्रबुद्ध नागरिक के रूप में विकसित होंगे तथा समाज में लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी। उप राष्ट्रपति ने कहा कि नई शिक्षा नीति मूलतः भारतीय होते हुए भी वैश्विक मानवता के लिए प्रासंगिक है। यह भारत के सनातन वैदिक चिंतन 'अनो भद्रा: कृत्वो यंतु विश्वत:' अर्थात विश्व भर से कल्याणकारी सद्विचारों का स्वागत है, इस भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि आधारभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान के लिए एक राष्ट्रीय मिशन की आवश्यकता थी। नई शिक्षा नीति में इस सामयिक कदम से प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी। युवा और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों से देश में साक्षरता का विकास होगा। वेंकैया ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध पर बल दिया गया है, तकनीकी के उपयोग, विभिन्न विषयों के बीच परस्पर सहयोग, सामंजस्य और संवाद, शिक्षकों का प्रशिक्षण, ये सभी सम्मिलित रूप से देश के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। उन्होंने कहा कि यह संतोष का विषय है कि नई शिक्षा नीति में शिशु शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया गया है तथा शिशु शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा के साथ जोड़कर देखा गया है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि इस महती प्रयास के लिए मैं डॉ कस्तूरीरंगन और उनके सहयोगियों का अभिनन्दन करता हूं। उन्होंने इस बहु प्रशिक्षित नई शिक्षा नीति को तैयार किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने के लिए सरकार ने 24 जून, 2017 को प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने 31 मई, 2019 को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी थी। उन्होंने कहा कि मुझे हर्ष है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति को स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिसे अनेक स्तर पर विभिन्न हितधारकों के साथ गहरे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/बच्चन-hindusthansamachar.in