अपडेट : दिल्ली प्रशासन संबंधी विधेयक को संसद की मंजूरी

अपडेट : दिल्ली प्रशासन संबंधी विधेयक को संसद की मंजूरी
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नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। राज्यसभा ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 को बुधवार को पारित कर दिया। जिसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा इस विधेयक को पेश किए जाते समय विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की। सदन ने 45 के मुकाबले 83 मतों से विधेयक को विचार के लिए स्वीकार कर लिया। विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष ने विधयेक की कमियों को उजागर किया है। सरकार इसे फिर भी पारित कराने पर आमादा है। ऐसे में हम सदन से बहिर्गमन कर रहे है। विपक्ष की गैर मौजूदगी के बीच सदन ने विधयेक से जुड़े संशोधन नामंजूर करते हुए ध्वनि मत से इसे पारित कर दिया। विधयेक के जरिए दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली की निर्वाचित सरकार के अधिकारों और भूमिका को स्पष्ट किया गया है। इस विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए रेड्डी ने कहा कि मूल कानून की धारा 21 में इस आशय का संशोधन प्रस्तावित है कि राज्य विधानसभा के कुछ मामलों में कानून बनाने पर प्रतिबंध के संबंध में सरकार से अभिप्राय उपराज्यपाल है। साथ ही राज्य विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर के विषयों पर यदि विधानसभा में कोई विधेयक पारित होता है तो इस पर उपराज्यपाल की सहमति, विधेयक को रोकना या उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजना शामिल किया गया है। रेड्डी ने आगे कहा कि विधेयक के उद्देश्यों के बारे में कहा गया है कि इसके जरिए विधानसभा और कार्यपालिका के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध स्थापित होंगे तथा उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार के दायित्वों के संबंध में स्पष्टता आएगी। यह विधेयक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का शासन-प्रशासन चलाने के लिए तय की गई संवैधानिक योजना और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार के अधिकारों और भूमिका को परिभाषित करने वाले विधेयक को लेकर राज्यसभा में बुधवार को गर्मागर्म चर्चा हुई। विपक्षी सदस्यों के हंगामें और सदन को कुछ समय के लिए स्थगित किए जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक-2021 पर फिर चर्चा हुई जिसमें विपक्ष और सत्तापक्ष में आरोप-प्रत्यारोप लगे। विपक्ष का आरोप था कि मोदी सरकार दिल्ली की निर्वाचित राज्य सरकार के अधिकारों में कटौती कर रही है। जबकि, सत्तापक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रकाश में इस विधेयक के जरिए स्पष्टता लाई गई है। विधेयक पेश करते हुए गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य भूपेन्द्र यादव ने इसका समर्थन किया। रेड्डी ने कहा कि यह विधेयक दिल्ली के संबंध में बनाए गए मूल कानून और संबंधित नियमों के अनुरूप है। कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह विधेयक संघवाद की मूलभावना के खिलाफ है। भारत का संघवाद संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है और इस विधेयक के जरिए बनने वाले कानून को सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर देगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जोर जबरदस्ती वाले संघवाद का उदाहरण है। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अनेक सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ. ब्रायन ने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि सदन में सत्तापक्ष का बहुमत नहीं है इसलिए वह सदन से बहिर्गमन करने की बजाय विधेयक के खिलाफ मतदान करें। उनकी अपील के बावजूद, बीजू जनता दल, वाईएसआर, समाजवादी पार्टी ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। भाजपा के भूपेन्द्र यादव ने कहा कि राजधानी दिल्ली की विशेष स्थिति है जिसके कारण इस राज्य में उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार की भूमिका को संतुलित रखा गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में राष्ट्रपति, राज्यों में राज्यों और संघशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल कार्यपालिका का प्रमुख होता है। दिल्ली के संबंध में भी इस विधेयक के जरिए यही व्यवस्था की गई है। यादव ने कहा कि निर्वाचित सदन की समितियों के अधिकारों और भूमिका के संबंध में विधेयक में कहा गया है कि राज्य विधानसभा के नियम-कानून लोकसभा के नियम-कायदों के अनुरूप होने चाहिए। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली में दो बार हार का सामना करने वाली भाजपा ने बदले की भावना से यह विधेयक पेश किया है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली के दो करोड़ लोगों के लिए न्याय चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि रोजमर्रा के कामकाज के लिए निर्वाचित सरकार को उपराज्यपाल की सहमति लेना जरूरी नही है। इस विधेयक को लोकसभा ने सोमवार को पारित कर दिया था। विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया गया लेकिन हंगामे के चलते इस पर चर्चा नहीं हो पाई। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप

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