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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औषधियों के लिए उत्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन योजना को मंजूरी दी

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नई दिल्ली, 24 फरवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार ने औषधियों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। इससे घरेलू निर्माताओं को लाभ मिलने के साथ ही रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बड़े पैमाने पर औषधियां उपलब्ध होने में सहूलियत होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल के फैसले के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस योजना से घरेलू निर्माताओं को लाभ मिलेगा, रोजगार सृजन में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बड़े पैमाने पर औषधियां उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 से 2028-29 की अवधि के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी गयी है। ऐसा समझा जा रहा कि इस योजना से देश में उच्च मूल्य के उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात में मूल्य संवर्धन में वृद्धि होगी। वर्ष 2022 से 2028 तक छह वर्ष की अवधि के दौरान वृद्धि संबंधी 2,94,000 करोड़ रुपये की कुल बिक्री होगी और कुल 1,96,000 करोड़ रुपये का वृद्धि संबंधी निर्यात होने की उम्मीद है। साथ ही इस योजना से कुशल और अकुशल दोनों तरह के रोजगार सृजित होंगे, क्षेत्र के विकास के परिणामस्वरूप 20,000 प्रत्यक्ष और 80,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होने का अनुमान है। केंद्र सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि उभरती हुई थेरेपियां और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरणों के साथ आयातित औषधियों में आत्मनिर्भरता सहित जटिल और उच्च तकनीक वाले उत्पादों के विकास के लिए नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सा उत्पाद भारतीय आबादी तक किफायती दामों में पहुंच सकेंगे। इस योजना से औषधीय क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। केंद्र की यह योजना औषधीय उद्योग के विकास की प्रमुख योजना का हिस्सा होगी। योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को बढ़ाकर भारत की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और औषधीय क्षेत्र में उत्पादों के विविधीकरण से लेकर उच्च मूल्य की वस्तुओं के लिए योगदान देना है। योजना का एक और उद्देश्य भारत के बाहर वैश्विक चैंपियन तैयार करना है जिनमें अत्याधुनिक एवं उच्चस्तरीय सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए आकार और पैमाने में बढ़ने की संभावना हो और इसके बाद वे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को समझ सकें। हिन्दुस्थान समाचार/अजीत