उज्जैन: दिल्ली-भोपाल में बढ़ी राजनीतिक हलचल के बाद इंटेलिजेंस विंग जोड़ रही तार

उज्जैन: दिल्ली-भोपाल में बढ़ी राजनीतिक हलचल के बाद इंटेलिजेंस विंग जोड़ रही तार
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उज्जैन,08 जून (हि.स.)। पिछले एक सप्ताह से दिल्ली और भोपाल में भाजपा नेताओं की मेल मुलाकात तथा व्हाट्स एप पर चलनेवाली खबरों को लेकर अब उज्जैन में भी इंटलीजेंस विंग द्वारा तारों को जोड़ा जा रहा है। यदि सूत्रों का दावा सही मानें तो पिछले सात दिनों में उज्जैन में भी छिटपुट खिचड़ी पकी और व्हाट्सएप पर कई पोस्टें डाली गई। ऐसी पोस्ट उन ग्रुपों पर डाली गई,जिन ग्रुप से साधारण आदमी नहीं जुड़ा है। यूं उज्जैन जिले की राजनीति पर नजर डाली जाए तो यहां कोई गुट विशेष नहीं है। उमा भारती के मुख्यमंत्री काल में कैलाश विजयवर्गीय उज्जैन-इंदौर संभाग के प्रमुख समर्थक रहे वहीं उज्जैन में उमा-कैलाश के समर्थकों की संख्या अच्छी खासी रही। इस दौरान शिवराज समर्थकों का कहीं पता नहीं था। जब शिवराजसिंह चौहान प्रदेशाध्यक्ष बने तो उनके समर्थन में अभाविप के उनसे जुड़े नई और पुरानी पीढ़ी के लोग आने लगे। यह साथ तब और बढ़ा जब चौहान मुख्यमंत्री बन गए। तत्कालिन समय उमा समर्थकों की भी मजबूरी हो गई थी कि वे शिवराज खेमे से जुड़े लोगों से कांधा से कांधा मिलाकर सत्ता सुख प्राप्त करें। बाद के समय में कैलाश समर्थक भी शिवराज खेमे में चले गए। पिछली सरकार का कार्यकाल जब आधा बीत चुका था,तब जिले के वे शिवराज समर्थक,जो राजनीतिक उठापठक के कारण हाशिए पर आ गए थे,सक्रिय होना शुरू हो गए थे। अंदर ही अंदर चल रहा था कि यदि पूछपरख नहीं होती है तो अगला नेतृत्व कौन करे,इस बात पर विचार किया जाए। हालांकि इस बात को बहुत अधिक हवा नहीं मिली और केंद्र का शिवराजसिंह चौहान को जिस प्रकार से समर्थन मिलता रहा,लोग बगावत से दूर रहे तथा इंतजार करते रहे कि जैसे ही अलाव जलेगा,तापना शुरू कर देंगे। यही अलाव पिछले सप्ताह जला तो जिले के कतिपय हाशिए पर किए गए भाजपा नेता/जनप्रतिनिधियों ने तापना शुरू कर दिया। हालांकि वे पूरी तरह से अपने ठण्डे हाथों को गर्म नहीं कर पाए थे कि कल नरोत्तम मिश्र और उसके बाद कैलाश विजयवर्गीय का बयान आ गया। इस बयान के आने के बाद तापनेवालों का दावा है कि तूफान से पहले की शांति है। लोगों ने तापना शुरू कर दिया है,अलाव में पर्याप्त ईधन है। ऐसे में मौसम तो बदलेगा.....। हिंदुस्थान समाचार/ललित ज्वेल