अरबी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला वापस ले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड : विहिप
अरबी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला वापस ले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड : विहिप
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अरबी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला वापस ले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड : विहिप

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नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों में अरबी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति के फैसले की निंदा की है। विहिप ने बोर्ड से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही केरल की जनता से इसका प्रचंड विरोध करने का आह्वान भी किया है। विहिप के केन्द्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि हम यह जानकर आश्चर्यचकित हैं कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड केरल में अपने प्रबंधन के अधीन आने वाले विद्यालयों में अरबी-भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। केरल की जनता को कृतसंकल्प होकर इस फैसले का प्रचंड विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अरबी भारतीय भाषा नहीं है। यह देश के संविधान में भारतीय भाषाओं की अनुसूची में भी नहीं है। पवित्र कुरान को पढ़ने, समझने और याद रखने के लिए इस भाषा का अधिक अध्ययन किया जाता है। अतः अरबी भाषा का शिक्षण हिंदुओं के धार्मिक एवं धर्मार्थ उद्देश्य के लिए नहीं है। हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों में समर्पित धनराशि से संचालित विद्यालयों में अरबी का शिक्षण एक अनुचित व्यय है। विहिप कार्याध्यक्ष आलोक कुमार के मुताबिक त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड का गठन त्रावणकोर कोचीन हिंदू धार्मिक संस्था अधिनियम, 1950 के अंतर्गत किया गया है। इस बोर्ड में तीन सदस्य हैं, जिनमें से दो केरल सरकार के मंत्रिपरिषद के हिंदू सदस्यों और तीसरे सदस्य केरल की विधानसभा के हिंदू सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। अतः स्पष्ट है की तीनों ही सदस्य राज्य की सत्ताधारी पार्टी से नामित हैं। उन्होंने कहा कि यह वाम मोर्चा सरकार द्वारा नामित सदस्यों द्वारा हिन्दुओं पर किया गया एक और हमला है। हिंदुओं द्वारा अपने इष्ट देवी-देवताओं को श्रध्दा पूर्वक अर्पित किया गया धन अरबी भाषा के शिक्षण के लिए जाएगा। यह स्वीकार्य नहीं है। आलोक कुमार ने कहा कि संस्कृत भाषा हजारों वर्षों की परम्परा में प्राप्त भारतीय आध्यात्मिक धरोहर का अमूल्य भंडार है। इसका शिक्षण त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड द्वारा संचालित स्कूलों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/पवन/बच्चन-hindusthansamachar.in