ये हैं समाज की नायिका, माता-पिता से ज्‍यादा अपने कर्म को दी महत्‍ता

ये हैं समाज की नायिका, माता-पिता से ज्‍यादा अपने कर्म को दी महत्‍ता
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भोपाल, 29 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना वायरस की दूसरी लहर बड़ी तेजी से अपने विकराल रूप में सभी के सामने आई है और बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है । कोरोना संक्रमण से प्रभावित होने वाले लोगों में सेवा कार्य में लगे चिकित्सक और उनके परिजन भी शामिल हैं। ऐसे कठिन समय में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ का सेवा भाव, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा व कठिन परिस्थितियों से जूझने की जीजिविषा देखते ही बनती है । ऐसा ही एक उदाहरण मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में सामने आया है, जहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर की सेकेन्ड ईयर पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट डॉ. साधना वर्मा को कोविड वार्ड में सेवाएँ देने के लिए नियुक्त किया गया था, उसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनके सिगरौली में निवासरत पिता राजकुमार वर्मा (आयु 55 वर्ष ) एवं माता श्रीमती शीला देवी वर्मा (आयु 53 वर्ष ) कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं । डॉक्टर साधना वर्मा के माता-पिता की देखभाल के लिए सिगरौली में कोई नहीं था, ऐसे में उनके समक्ष दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गयी कि वे क्या करें । अपने माता-पिता की संतान होने के नाते उनके प्रति विपदा में सेवा का धर्म निभाएं या संपूर्ण समाज पर कोरोना का जो व्यापक संकट छाया है, जिसमें कि उनके जैसे कई बेटा-बेटियों के माता-पिता ठीक होने की आशा में अस्पताल आ रहे हैं उनकी सेवा करें । वास्तव में इस प्राकर की विपरीत परिस्थितियों में धैर्य व संयम का परिचय देते हुए उन्होंने अपने माता-पिता को जबलपुर बुलाने का निर्णय लिया तथा मेडिकल के कोविड वार्ड में एडमिट कर अन्य मरीजों की सेवा के साथ-साथ अपने माता-पिता के प्रति संतान होने के दायित्व को भी निभाया । बताना होगा कि उनके इस निर्णय से जहां 24 अप्रैल को उनके माता-पिता स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो चुके हैं तथा अब घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। वहीं, इस दौरान डॉक्टर साधना वर्मा के प्रयासों से कई अन्य लोगों को भी जीवन की संजीवनी मिली है जिसके बाद कहा जा सकता है कि ऐसे ही कर्मवीरो की कर्तव्यनिष्ठा व समर्पण से आज हम कोरोना को परास्त करने की ओर बढ़ रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. मयंक चतुर्वेदी