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बिहार में बेतिया के युवा ने लिखी आत्मनिर्भता की नई इबादत

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पटना/बेतिया, 28 फरवरी (हि.स.)। बिहार में बेतिया जिले के एक युवक प्रमोद ने कोरोना काल को अवसर में बदलकर प्रदेश के युवाओं को नयी राह दिखाई है। लॉकडाउन के वक्त काम की तंगी के कारण प्रमोद घर लौटे थे। पहले वे दिल्ली में मजदूरी करते थे। घर लौट कर उन्होंने एलईडी बल्ब की फैक्टरी लगा ली। इसमें प्रमोद की मदद उनकी पत्नी और दोस्तों ने की। बहुत से युवाओं को दिया है रोजगार जिले के मझौलिया प्रखंड के रतनमाला पंचायत के रहने वाले प्रमोद बैठा दिल्ली की एलईडी बल्ब की फैक्टरी में बतौर टेक्नीशियन का काम करते थे। लेकिन आज प्रमोद बैठा आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश कर रहे हैं। अपने हाथों के हुनर, कड़ी मेहनत, सच्ची लगन और कुछ कर दिखाने के जज्बे के साथ प्रमोद बैठा अपने प्रदेश पश्चिमी चंपारण जिले के मझौलिया के रतनमाला अपने घर पहुंचे। अपने हुनर और आत्मविश्वास के साथ अपने घर रतनमाला में ही एलईडी बल्ब बनाने का एक छोटा सा कारखाना डाल दिया। प्रतिदिन प्रमोद बैठा के इस छोटे से कारखाने में 1000 एलईडी बल्ब बनकर तैयार होता है।प्रमोद बैठा पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के दुकानों में एलईडी बल्ब की सप्लाई करते हैं।प्रमोद बैठा के इस कारोबार में उनकी पत्नी भी साथ देती हैं। हमारे बेतिया संवाददाता से बातचीत में प्रमोद बैठा ने बताया कि एक बल्ब बनाने में उनको 12 रुपये की लागत आती है। बाजार में इसे हम 14 से 15 रुपये में बेचते हैं। प्रति बल्ब प्रमोद 2 रुपये मुनाफा कमाते हैं. प्रतिदिन 1000 बल्ब देने रामनगर, नरकटियागंज, बेतिया, बगहा, पूर्वी चंपारण के सुगौली, अरेराज और रक्सौल तक जाते हैं। प्रमोद का कहना है कि मार्केट से 5000 बल्ब की प्रतिदिन डिमांड है, लेकिन पूंजी के अभाव में अभी वह महज एक हजार बल्ब रोजाना बना पाते हैं।इससे बाजार का ऑर्डर पूरा नहीं हो पाता। पत्नी और दोस्तों ने की मदद प्रमोद बैठा और उनकी पत्नी संजू देवी ने बताया कि दिल्ली से घर आकर इस काम के शुरुआती दौर में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे सफलता मिली. प्रमोद के अनुसार जब कारखाना लगाने में पैसे की कमी आई तो उसकी पत्नी ने उसका साथ दिया। स्वयं सहायता समूह से 25,000 लोन ले लिया. साथ में कुछ सगे संबंधी मित्रों ने भी खुले हाथ से उसे उधार दिया. जिसकी बदौलत पूंजी तैयार कर उसने 3 लाख 50 हजार रुपए की लागत से बल्ब फैक्ट्री लगा ली। हिन्दुस्थान समाचार /गोविन्द/अमानुल/रामानुज