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सादगी से खोले गये तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ के कपाट

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देवस्थानम् बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी व तीर्थ पुरोहित ही रहे मौजूद रुद्रप्रयाग, 17 मई (हि.स.)। भगवान तुंगनाथ के कपाट लग्नानुसार वैदिक मंत्रोंच्चारण तथा जय शंकर, जय तुंगनाथ बाबा के उद्घोषों के साथ पौराणिक परम्पराओं व रीति-रिवाज के साथ ग्रीष्मकाल के लिए आज खोल दिये गये। सोमवार को तुंगनाथ यात्रा के आधार शिविर चोपता में बह्मबेला पर पंडित विजय भारत मैठाणी, संजय मैठाणी, विनोद मैठाणी व अतुल मैठाणी ने पंचाग पूजन के तहत तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का आह्वान किया और भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों का रुद्राभिषेक कर आरती उतारी। इसके बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों को डोली में विराजमान कर चल विग्रह उत्सव डोली का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रृंगार कर पुनः आरती उतारी गई। भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ठीक आठ बजे चोपता से धाम के लिए रवाना हुई और सुरम्य मखमली बुग्यालों में नृत्य करते हुए भुजगलि पहुंची और पंचनाम देवताओं को शीश नवाया। भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने सुरम्य मखमली बुग्यालों व देव दर्शनी में कुछ देर विश्राम करने के बाद स्थानीय वाध्य यंत्रों की मधुर धुनों के साथ अपने धाम पहुंचीं। तुंगनाथ भगवान ने भूतनाथ मंदिर पहुंचने पर पौराणिक पाषाणों को तोडे़ जाने पर नाराजगी व्यक्त की। भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के मन्दिर परिसर प्रवेश करते ही भगवान तुंगनाथ नर रूप में अवतरित हुए और शीतकाल में धाम में सैलानियों की आवाजाही होने पर तपस्या में बाधा उत्पन्न होने की बात कही, जिस पर भक्तों ने विनती कर भगवान तुंगनाथ को शान्त किया। भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने मुख्य मन्दिर सहित सहायक मन्दिरों की तीन परिक्रमा की। डोली के मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भगवान तुंगनाथ के कपाट लग्नानुसार वैदिक मंत्रोंच्चारण तथा जय शंकर, जय तुगनाथ बाबा के उदघोषों के साथ पौराणिक परम्पराओं व रीति रिवाज के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिये गये। कपाट खुलने के बाद मठापति राम प्रसाद मैठाणी, आचार्य लम्बोदर प्रसाद मैठाणी सहित सभी तीर्थ पुरोहितों ने भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग की पूजा-अर्चना, दान, कर आरती उतारी तथा तीर्थ पुरोहितों व देवस्थानम् बोर्ड के अधिकारियों ने जलाभिषेक कर मनौती मांगी। कपाट खुलने के बाद भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग से भस्मी, चन्दन व पुष्पों को श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया। कपाट खुलने के बाद तहसील प्रशासन के निर्देश के अनुसार चार हक-हकूकधारी व चार देवस्थानम् बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी तुंगनाथ धाम में मौजूद रहेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित डिमरी