इटली के दो नौसैनिकों पर भारत में चल रहे मुकदमे को बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सहमत

इटली के दो नौसैनिकों पर भारत में चल रहे मुकदमे को बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सहमत
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नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट 2012 में केरल के दो मछुआरों को अपराधी समझ कर मार देने वाले इटली के दो नौसैनिकों पर भारत में चल रहे मुकदमे को बंद करने पर सहमत हो गया है। जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर 15 जून को औपचारिक फैसला सुनाने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए 10 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर दिया गया है। मुआवजे के बंटवारे पर फैसला करना केरल सरकार पर निर्भर है। इटली सरकार के वकील का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल की ओर से अवार्ड घोषित किए जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत के समक्ष इटली के नौसैनिकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को भी बंद कर दिया जाना चाहिए। मेहता ने कहा कि ट्रिब्युनल ने कहा था कि इटली सरकार के पास नौसैनिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार सुरक्षित है। सुनवाई के दौरान केरल सरकार के वकील ने कहा कि जब तक इस अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया था तब तक पीड़ितों के पास कुछ भी नहीं था। घटना के बाद राज्य में बहुत आक्रोश था। हालांकि वे अब संतुष्ट थे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि धन को केरल हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है और हाईकोर्ट पीड़ितों को दी जाने वाली राशि के वितरण के पहलू की निगरानी कर सकता है। पिछले 9 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश के मुताबिक इटली 10 करोड़ रुपये मुआवजा दे रहा है। सात अगस्त, 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो 2012 में केरल के दो मछुआरों को दस्यु समझ कर मार देने वाले इटली के नौसैनिकों के खिलाफ केस पीड़ितों के परिवार के सदस्यों की बात सुनने के बाद ही बंद करेगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देना सुनिश्चित करे। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि केंद्र सरकार ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश को स्वीकार करने का फैसला किया है। इस पर केरल सरकार की ओर से वकील आदित्य वर्मा ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में विरोधाभास है। जब तक घरेलू कानून में बदलाव नहीं किया जाएगा तब तक अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को लागू नहीं किया जा सकता है। तब कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वो केस को बंद करने के लिए ट्रायल कोर्ट जाने की बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट में क्यों आई। ट्रायल कोर्ट में पीड़ितों के परिवार के सदस्य भी पक्षकार हैं। सुप्रीम कोर्ट में तो वे पक्षकार भी नहीं हैं। तीन जुलाई, 2020 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वो लंबित मामला बंद कर दे। केंद्र ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कहा है कि भारत को इटली से हर्जाना वसूलने का हक है लेकिन नौसैनिकों पर मुकदमा इटली में चलेगा। ज्ञातव्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले इटली के दोनों मरीन को इटली में रहने की इजाजत दे दी थी। दोनों पर आरोप है कि वर्ष 2012 में भारतीय समुद्री सीमा में केरल के मछुआरों को गोली मारकर हत्या कर दी। जबकि इन मरीन्स का कहना है कि उन्होंने मछुआरों को समुद्री डाकू समझकर गोली चलाई थी। हिन्दुस्थान समाचार/संजय