संकट के समय सतही सियासत

संकट के समय सतही सियासत
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डॉ. दिलीप अग्निहोत्री पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने कोरोना से अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वर्चुअल संवाद किया था। पिछले एक वर्ष के दौरान ऐसी अनेक वर्चुअल बैठकें हुई। इनका सजीव प्रसारण भी होता रहा है। लेकिन इसबार बैठक को गोपनीय रखने का निर्णय किया गया था। इसका कारण था कि सभी मुख्यमंत्री अपने-अपने प्रदेशों की वास्तविक स्थिति व आवश्यकताओं को खुलकर बता सकें। इस दूसरी लहर का संकट अभूतपूर्व है। यह ध्यान रखा गया कि आमजन तक नकारात्मक या मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला सन्देश न जाये। अरविंद केजरीवाल के अलावा अन्य सभी मुख्यमंत्रियों ने इस मर्यादा का ध्यान रखा। लेकिन केजरीवाल के इसे अपनी राजनीति का अवसर माना। वह इस अवसर को हाथ से छोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने सुनियोजित ढंग से अपनी बात की वीडियो सार्वजनिक कर दिया। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि केंद्र सरकार कितनी सहायता दे रही है। उन्हें तो केवल यह बताना था कि वह दिल्ली के लोगों के लिए बहुत परेशान हैं। ऑक्सीजन आपूर्ति और बेड बढ़ाने की केंद्र से मांग कर रहे हैं। केजरीवाल का इंतजाम पक्का था। कुछ निजी चैनल उनके इस बयान का सजीव प्रसारण कर रहे थे। अरविंद केजरीवाल अनाड़ी नहीं हैं। वह जानते थे कि गोपनीयता भंग करना गलत है। ऐसा करके उन्होंने अपनी विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा लिया। बात उठी तो माफी मांग ली। लेकिन तब तक वह अपनी राजनीति खेल चुके थे। संकट काल में ऐसी राजनीति निन्दनीय ही कही जाएगी। सच्चाई सामने आ ही गई। अरविंद केजरीवाल वर्चुअल बैठक का वीडियो दिखाकर यह बताना चाह रहे थे कि वह ऑक्सीजन देने की केंद्र से गुहार लगा रहे हैं। वह कह रहे थे कि दिल्ली सरकार के पास ऑक्सीजन प्लांट नहीं है तो क्या उसे ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। इस तरह उन्होंने पूरा ठीकरा केंद्र पर फोड़ दिया। यह मान लिया कि उनका राजनीतिक खेल सफल रहा। केजरीवाल ने दिखावे के लिए माफी मांग ली। लेकिन उनके भक्त केंद्र पर हमला बोल रहे थे। उनका कहना था कि फ्री बिजली-पानी दे दिया, क्या अब ऑक्सीजन भी दोगे। इस तरह संकट के इस दौर में भी केजरीवाल अपना प्रचार करा रहे थे। लेकिन शीघ्र ही केजरीवाल की हकीकत सामने आ गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के बयान से केजरीवाल की सच्चाई सामने आ गई। केजरीवाल वर्चुअल मीटिंग की वीडियो में कह रहे थे कि क्या दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने तथ्यों के आधार पर बताया कि दिल्ली को उनकी मांग व कोटे से अधिक ऑक्सीजन दिया गया है। इसके उचित ढंग से इस्तेमाल की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार पर है। लेकिन दिल्ली सरकार ऐसा करने में विफल हुई है। अस्पतालों से लगातार ऑक्सीजन खत्म होने की खबर आती रही। इसके दृष्टिगत डॉ. हर्षवर्धन का बयान महत्वपूर्ण है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने जितनी मांग की थी, उससे अधिक ऑक्सीजन का कोटा उन्हें दिया गया है। अब यह उन पर है कि वे इसका किस तरह निर्धारण करते हैं। सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर एंड हॉस्पिटल का दौरा करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा, भारत में ऑक्सीजन के उत्पादन के हिसाब से हर राज्य को उसके कोटे के हिसाब से ऑक्सीजन दिया गया है। यहां तक कि दिल्ली को उसके मांगे गए कोटे से अधिक ऑक्सीजन दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इसके लिए कल प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया था। अब व्यवस्थित तरीके से कोटा बांटने पर राजधानी की सरकार को प्लान बनाना चाहिए। केंद्र सरकार ने दिल्ली को यह भरोसा दिलाया है कि ऑक्सीजन के परिवहन में कहीं कोई रुकावट नहीं आएगी। अगर कोई बाधा डालता है तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत कई लोगों ने ऑक्सीजन केंटेनर को नहीं पहुंचने देने का आरोप लगाया था। केंद्र सरकार बिना भेदभाव के राज्यों की सहायता कर रही है। केंद्र इस पर राजनीति नहीं करना चाहती। अरविंद केजरीवाल केवल राजनीति ही करना चाहते हैं इसलिए केंद्र की सहायता के विषय पर गोपनीयता रखी। केंद्र पर हमला बोलने के बयान को सार्वजनिक कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा करने पर आपत्ति जाहिर की थी। अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर अपना बयान सार्वजनिक किया था। वह प्रधानमंत्री से प्रश्न कर रहे थे कि दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी है। अगर यहां ऑक्सीजन पैदा करने वाला प्लांट नहीं है तो क्या दिल्ली के लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। कृपया सुझाव दें कि सेंट्रल गवर्नमेंट में मुझे किससे बात करनी चाहिए। जब दिल्ली के लिए ऑक्सीजन टैंकर को दूसरे राज्य में रोका जाता है। मतलब केंद्र दोषी, दिल्ली के आसपास की सभी सरकारें दोषी, केवल केजरीवाल ही महान हैं। केजरीवाल का ज्ञान यहीं तक सीमित नहीं था। केंद्र सरकार जो कर रही थी,उसके भी वह सुझाव देने लगे। जिससे पता चले कि उनकी सलाह पर केंद्र सरकार चल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि ऑक्सीजन की कमी काफी ज्यादा है, सरकार को देश के ऑक्सीजन प्लांट को कंट्रोल में लेकर सेना को सौंप देना चाहिए ताकि सभी राज्यों को ऑक्सीजन तुरंत मिल पाए। मुख्यमंत्री ने अपील की है कि हवाई मार्ग से भी ऑक्सीजन मिलनी चाहिए, जबकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस की सुविधा दिल्ली में भी शुरू होनी चाहिए। देश में वैक्सीन सभी को एक ही दाम पर मिलनी चाहिए, केंद्र राज्य को अलग-अलग दाम में वैक्सीन नहीं मिलनी चाहिए। इसके पहले भी दिल्ली के मुख्यमंत्री पड़ोसी राज्यों के द्वारा ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने का आरोप लगा चुके हैं। योगी आदित्यनाथ ने भी केजरीवाल की इस राजनीति को निंदनीय बताया। कहा कि अरविंद केजरीवाल का एक और कारनामा सामने आया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चल रही उच्चस्तरीय बैठक, जिसमें देश के कई वरिष्ठ मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्रीगण भी मौजूद थे,उस बैठक की गोपनीयता को भंग कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास इन्होंने किया। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार अपनी नाकामयाबियों को छिपाने के लिए दूसरों पर निराधार आरोप-प्रत्यारोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। राजनीति का यह अभद्र और घटिया आचरण है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)