राम- शरद कोठारी की बहन भूमिपूजन में होंगी शामिल
राम- शरद कोठारी की बहन भूमिपूजन में होंगी शामिल
देश

राम- शरद कोठारी की बहन भूमिपूजन में होंगी शामिल

news

कोलकाता, 31 जुलाई (हि.स.)। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का सदियों से प्रतीक्षित सपना पूरा होने जा रहा है। आगामी 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में अयोध्या में भूमि पूजन होगा और राम मंदिर की आधारशिला भी रखी जाएगी। पिछले 500 सालों में जन्मभूमि मुक्ति और राम मंदिर निर्माण के लिए अनगिनत आंदोलन हुए हैं। अधिकतर की यादें धुंधली हो गई हैं लेकिन एक तस्वीर लोगों के दिलों दिमाग पर हमेशा छाई रहती हैं। यह तस्वीर 30 अक्टूबर 1990 में की है जब विवादित ढांचे के गुम्बद पर लोग चढ़ गए थे और भगवा पताका फहरा दी गई थी। दूसरे दिन अखबारों जो खबर छपी थी और उसके साथ एक तस्वीर जो पूरे देश के जेहन पर छप गई थी, वह तस्वीर थी दो भाइयों की राम कुमार कोठारी और शरद कोठारी। कोलकाता से दोनों भाई प्रण लेकर निकले थे और अवैध मस्जिद पर भगवा लहरा दिया था। राम कोठारी के हाथ से गुंबद के सबसे ऊपरी हिस्से में भगवा झंडा लहरा रहा था और शरद कोठारी उनकी बगल में खड़े नारे लगा रहे थे। रामलला की दहलीज तक पहुंचे इन दोनों भाइयों के साथ सैकड़ों लोग भी थे । जिन्होंने संकल्पबद्ध तरीके से बाबरी विध्वंस किया और भगवा लहराया। लेकिन तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार को यह सब नागवार गुजरा और 2 नवंबर 1990 को उन्होंने कारसेवकों पर गोलीबारी का आदेश दे दिया। अर्धसैनिक वालों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिनके भी कपड़े भगवा दिखते थे या जिनके शरीर पर भगवा कोई भी वस्त्र रहता था उन्हें गोली मारी जाने लगी। भगदड़ के बीच कोठारी बंधु लाल कोठी के निकट एक घर की ओट में छिप गए थे। जब गोलियों की बौछार थमी तो वे बाहर निकले, पर घात लगाए बैठे उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों और गुंडों ने राम कोठारी और शरद कोठारी को गोलियों से छलनी कर दिया। राम जन्मभूमि के लिए बलिदान देने वाले इन दोनों भाइयों की यादें सबसे ज्यादा ताजा इसलिए भी हैं क्योंकि भूमि पूजन और आधारशिला में इनकी बहन पूर्णिमा कोठारी शामिल हो रही हैं। 4 अगस्त को वह अयोध्या पहुंच जाएंगी और 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। उन्हें राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट की ओर से विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। "हिन्दुस्थान समाचार" से विशेष बातचीत में पुराने दिनों को याद करते हुए पूर्णिमा कोठारी की आंखें नम हो गईं। उन दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 22 अक्टूबर को उनके दोनों भाई घर से रवाना हुए थे। उस समय राम कोठारी 22 साल के और शरद कोठारी महज 20 साल के थे। दोनों ने जाते-जाते मां और पिता से विदा ली थी। मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले कोठारी बंधु का पूरा परिवार कोलकाता में कारोबार करता है। उनके पिता हीरालाल दोनों बेटों को विश्व हिंदू परिषद और अन्य नेताओं के साथ अयोध्या जाते देख दुखी नहीं हुए थे। पूर्णिमा ने बताया कि उसी वर्ष उनकी शादी होनी थी लेकिन दोनों भाइयों में रामलला के प्रति इतनी श्रद्धा थी कि जब मंदिर निर्माण के लिए देश भर से लोगों का जत्था जुटने लगा तो वे घर पर नहीं रह सके और मां-बाप से आज्ञा लेकर अयोध्या के लिए निकल पड़े थे। पूर्णिमा ने बताया कि जाते-जाते उनके पिता हीरालाल ने उन्हें एक पोस्टकार्ड दिया था और कहा था कि स्थिति के बारे में चिट्ठी लिखकर जानकारी देते रहें, लेकिन उनका पोस्टकार्ड आने से पहले उनकी मौत की खबर आई थी। उन्होंने बताया कि गोलियों से छलनी कर दिए गए कोठारी बंधुओं का अंतिम संस्कार उनके बड़े भाई और पिता ने सरयू नदी के किनारे उत्तर प्रदेश में ही किया था। कोठारी बंधुओं के सफर को याद करते हुए पूर्णिमा बताती है कि 22 अक्टूबर को दोनों भाई ट्रेन से रवाना हुए। उत्तर प्रदेश की सरकार ने कारसेवकों को रोकने के लिए ट्रेन को सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जिसकी वजह से दोनों वहां से टैक्सी लेकर आगे बढ़ने लगे, लेकिन आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे में पुलिस की जबरदस्त घेराबंदी थी इसलिए टैक्सी भी छोड़नी पड़ी और 200 किलोमीटर पैदल चलकर दोनों भाई अयोध्या पहुंचे थे। पुलिस की लाख रोक-टोक और बंदिशों के बावजूद दूसरे कारसेवकों के साथ कोठारी बंधु विवादित ढांचे को ढहाने के लिए गुंबद पर चढ़ गए थे और भगवा लहरा दिया था। दोनों ने दिखा दिया था कि हिंदू अस्मिता पर कलंक का ढांचा गिराने के लिए पूरे देश में किस तरह से संकल्प स्थापित हुआ था। अपने भाइयों की चिट्ठी को याद करते हुए पूर्णिमा रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि उनके अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद उनका लिखा हुआ पोस्टकार्ड आया था जिसमें लिखा था कि बहन तुम चिंता मत करना तुम्हारी शादी से पहले हम लोग आ जाएंगे। पूर्णिमा ने कहा कि उन्हें गर्व है कि राम और शरद कोठारी उनके भाई थे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की खबर उनके लिए सबसे ज्यादा खुशी देने वाली है। पूर्णिमा ने कहा, "30 साल में यह खबर मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी देने वाली है। अपने मां-बाप को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 2002 में मां की मौत हो गई और 2016 में पिता की। दो दशक तक बेटे की मौत का दुख लेकर दोनों जीते रहे लेकिन कभी इस बात का अफसोस नहीं किया कि दोनों भाई क्यों गए। उन्होंने कहा कि कोठारी बंधुओं की वजह से उनके परिवार को पूरा देश सम्मान की नजर से देखता है। आज जब राम मंदिर की नींव रखी जा रही है तो दोनों भाइयों की शहादत भी सार्थक नजर आ रही है। पूर्णिमा ने कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि अपने भाइयों की वजह से दुनिया के सबसे भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए आधारशिला रखने जा रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश/मधुप-hindusthansamachar.in