बिहार में गांगेय डॉल्फिन की गतिविधियों पर होगा शोध

 बिहार में गांगेय डॉल्फिन की गतिविधियों पर होगा शोध
research-will-be-done-on-activities-of-galactic-dolphin-in-bihar

पटना, 31 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार में अब डॉल्फिन की प्रत्येक गतिविधियों पर शोध होगा। समुद्री डाल्फिन शो की तरह यहां भी गांगेय डाल्फिन का शो आयोजित किया जाएगा। बिहार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार सिंह ने कहा कि पटना साइंस कालेज में देश के पहले डाल्फिन रिसर्च सेंटर के कार्यालय का शुक्रवार को उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि समुद्री डाल्फिन शो की तरह गांगेय डाल्फिन का शो आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन रिसर्च सेंटर खुलने के बाद इस राष्ट्रीय जलीय जीव पर शोध के क्रिया कलापों को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय जल जीव घोषित गांगेय डाल्फिन को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि रिसर्च के लिए गंगा या कोसी नदी के पास दो-तीन किलोमीटर का कैनाल बनाया जाएगा। इसमें 10-15 डाल्फिन को रखकर उसकी हर गतिविधि पर रिसर्च किया जाएगा। विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि यहां डॉल्फिन के व्यवहार, रहन-सहन , खाद्य प्रणाली सहित शोध करने वाले नजदीक से समझ सकेंगे। रिसर्च सेंटर के अंतरिम निदेशक गोपाल शर्मा बताते हैं कि गंगा में सर्वे के मुताबिक राज्य में डॉल्फिनों की संख्या 1450 से अधिक बताई गई है। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन रिसर्च सेंटर में डॉल्फिन की हर गतिविधियों पर शोध होगा। उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए काम होंगे। उल्लेखनीय है कि डॉल्फिन मैन के नाम से चर्चित प्रो. आर के सिन्हा इस रिसर्च सेंटर के लिए वर्ष 1994 से प्रयासरत थे। बताया जा रहा है कि इस रिसर्च सेंटर में फिलहाल चार लोगों की टीम है, लेकिन बाद में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। मंत्री ने कहा कि डॉल्फिन के संरक्षण के लिए जागरूकता सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन के संरक्षण के लिए मछुआरों को भी जागरूक किया जाना आवश्यक है। बिहार में डॉल्फिन को सोंस भी कहा जाता है। --आईएएनएस एमएनपी/एएनएम

अन्य खबरें

No stories found.