राजस्‍थान: विधानसभा सत्र जल्‍द बुलाए जाने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने
राजस्‍थान: विधानसभा सत्र जल्‍द बुलाए जाने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने
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राजस्‍थान: विधानसभा सत्र जल्‍द बुलाए जाने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने

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जयपुर, 24 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान में सियासी संकट के बीच जल्द विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। राज्यपाल मिश्र के जल्दबाजी में विधानसभा सत्र बुलाए जाने पर निर्णय नहीं लेने पर मुख्यमंत्री गहलोत और उनके समर्थित विधायकों ने राजभवन में धरना दे दिया है। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से केबिनेट के सत्र बुलाए जाने का अनुरोध स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा कि जब तक हमें जवाब नहीं मिलेगा, हम राजभवन से जाने वाले नहीं है। इस पर राज्यपाल मिश्र ने कहा कि दबाव की राजनीति ठीक नहीं है। यह मंत्रियों और विधायकों की गरिमा के खिलाफ है। दबाव में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने सचिन पायलट सहित 19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दिए नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर राहत देते हुए मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने राजभवन के बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सत्र बुलाकर बहुमत साबित करने के साथ-साथ हम कोरोना महामारी समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे, लेकिन संवैधानिक मुखिया हमारे अनुरोध को नहीं मान रहे हैं। हमारे कुछ साथियों को मानेसर में बंधक बनाया हुआ है, वे भी सत्र में आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ऊपरी दवाब के यह संभव नहीं है कि राज्यपाल केबिनेट के फैसले को नहीं माने। हमें जवाब मिलना चाहिए था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। आज भी हमने अनुरोध किया, लेकिन हमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। हमने साथियों से अनुरोध किया है कि हमें महात्मा गांधी के रास्ते पर चलना है और उसी अनुरूप हम यहां बैठे है। राज्यपाल कलराज मिश्र सुलझे हुए इंसान है, उनका अलग व्यक्तित्व है, यकीन है कि राज्यपाल हमें जल्द अपना फैसला सुनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमेशा विपक्ष यह मांग करता है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए, लेकिन प्रदेश में उल्टी गंगा बह रही है। सरकार खुद कह रही है कि हम फ्लोर पर जाना चाहते हैं। लेकिन, विपक्ष विरोध कर रहा है। इससे समझा जा सकता है कि भाजपा का हाथ सरकार को अस्थिर करने में ज्यादा है। प्रदेश की जनता में वर्तमान स्थितियों को लेकर गुस्सा है। राजभवन घेराव वाले बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे उकसाने की राजनीति नहीं थी। राज्यपाल के सख्त रुख के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता शनिवार सुबह 11 बजे पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर केन्द्र के इस कथित षडय़ंत्र का पर्दाफाश करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठी अदृश्य शक्तियां सरकार गिराने की कुचेष्टा कर रही है। इससे पहले गहलोत समर्थित विधायक चार बसों से होटल फेयरमोंट से राजभवन पहुंचे। राज्यपाल ने सभी विधायकों को राजभवन में प्रवेश की अनुमति दी लेकिन विधायकों ने राजभवन के लॉन में बैठकर नारेबाजी की। राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में संभवत: पहली बार है, जब राजभवन के भीतर विधायकों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राज्यपाल ने विधायकों से बाहर आकर मुलाकात भी की और उन्हें शांत रहने का आग्रह किया। विधायक विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को लेकर राजभवन के लॉन में धरने पर बैठ गए। राजभवन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने होटल फेयरमोंट के बाहर भी पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हम असेम्बली में बहुमत साबित करना चाह रहे हैं लेकिन राज्यपाल ऊपरी दवाब के कारण हमें मंजूरी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर राज्यपाल ने अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसला नहीं किया और प्रदेश की जनता ने राजभवन घेर लिया तो उनकी जिम्मेदारी नहीं होगी। इस बीच, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कतारें लगाकर मतदान करवाया गया तो फिर अब विधानसभा सत्र बुलाने में कहां ऐतराज है। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना की ही आशंका है तो हम सभी 200 विधायकों का टेस्ट करवाने को तैयार है। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में किट और अन्य संसाधन है। राज्यमंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि जब तक गर्वनर कोई फैसला नहीं लेंगे, तब तक सभी विधायक राजभवन में बैठे रहेंगे। अनुमति नहीं मिलने पर टेंट लगाकर यहीं बैठे रहेंगे। कांग्रेस के इस घटनाक्रम के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि बहुमत सिद्ध करने की मांग करना कांग्रेस का अधिकार है लेकिन अब मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। लगता है कि गहलोत साहब अपनी ही पार्टी के विधायकों का विश्वास खो चुके हैं। हमें नहीं लगता है कि सरकार के पास बहुमत है। अब मामले का निस्तारण न्यायालय के जरिए ही हो सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/संदीप / ईश्वर/सुनीत-hindusthansamachar.in