राजभवन ने तीन बिन्दुओं के साथ गहलोत सरकार को लौटाया सत्र बुलाने का संशोधित प्रस्ताव
राजभवन ने तीन बिन्दुओं के साथ गहलोत सरकार को लौटाया सत्र बुलाने का संशोधित प्रस्ताव
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राजभवन ने तीन बिन्दुओं के साथ गहलोत सरकार को लौटाया सत्र बुलाने का संशोधित प्रस्ताव

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जयपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्य मंत्रिमंडल की ओर से 25 जुलाई को राजभवन भेजे गए 31 जुलाई से सत्र आहूत करने के संशोधित प्रस्ताव को सोमवार को कुछ बिंदुओं के साथ संसदीय कार्य विभाग को लौटा दिया है। इसमें राज्यपाल की ओर से कहा गया है कि विधानसभा सत्र संवैधानिक प्रावधानों के अनुकूल आहूत होना आवश्यक है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि राजभवन की विधानसभा सत्र नहीं बुलाने की कोई मंशा नहीं है। इससे पहले शुक्रवार को राज्यपाल ने सरकार के प्रस्ताव को कुछ बिंदुओं पर कार्यवाही के निर्देश के साथ लौटाया था। राज्यपाल मिश्र ने कहा है कि विधानसभा सत्र संवैधानिक प्रावधानों के अनुकूल आहूत होना जरूरी है। राज्यपाल ने राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 174 के अंतर्गत तीन परामर्श देते हुए विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि राजभवन की विधानसभा सत्र नहीं बुलाने की कोई भी मंशा नहीं है। प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में राज्य सरकार के बयान से यह साफ है कि राज्य सरकार विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है, परंतु सत्र बुलाने के प्रस्ताव में इसका उल्लेख नहीं है। यदि राज्य सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्पावधि में सत्र बुलाए जाने का युक्तिसंगत आधार बन सकता है। राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में लिखा था कि राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 में मंत्रिमंडल की सलाह मानने को बाध्य है। राज्यपाल विवेक से कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय नाबाम रबिया एवं बमांग फेलिक्स बनाम विधानसभा उपाध्यक्ष अरुणाचल प्रदेश (2016) 8 एसीसी 1 के पैरा 162 के उल्लेख पर राज्यपाल मिश्र ने विधिक राय ली। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा 150 से 162 का अध्ययन किया गया, जिससे यह तथ्य सामने आया कि संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के अन्तर्गत राज्यपाल साधारण परिस्थिति में मंत्रिमंडल की सलाह के अनुरूप ही कार्य करेंगे। परंतु यदि परिस्थितियां विशेष हों तो राज्यपाल यह तय करेंगे कि विधानसभा का सत्र संविधान की भावना के अनुरूप बुलाया जाए। कोरोना के कारण वर्तमान में परिस्थितियां असाधारण हैं, इसलिए राज्य सरकार को तीन बिन्दुओं पर कार्यवाही करने का परामर्श देते हुए राजभवन द्वारा पत्रावली पुन: प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पहला बिन्दु यह है कि विधानसभा का सत्र 21 दिन का स्पष्ट नोटिस देकर बुलाया जाए। इस दौरान महत्वपूर्ण सामाजिक व राजनीतिक प्रकरणों पर स्वस्थ बहस ऑनलाइन प्लेटफार्म पर की जाएं। दूसरे बिन्दु के अनुसार विश्वास मत हासिल करने की कार्यवाही संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाएं। साथ ही सम्पूर्ण कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा विश्वास मत केवल हां या ना के बटन से ही हासिल किया जाए। विश्वास मत का सजीव प्रसारण किया जाए। तीसरे बिन्दु में विधानसभा सत्र बुलाने के दौरान सामाजिक दूरी का पालन करने की व्यवस्था के बारे में पूछा गया है। इसमें साफ किया गया है कि 200 विधायक और 1000 से अधिक अधिकारी/कर्मचारियों के एकत्रीकरण पर उन्हें संक्रमण के खतरे से कैसे बचाया जाएगा। क्योंकि राजस्थान विधानसभा में 200 विधायकों व 1000 से अधिक अधिकारी/कर्मचारियों के एकसाथ दूरी बनाकर बैठने की व्यवस्था नहीं है, जबकि संक्रमण को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम एवं भारत सरकार के दिशा-निर्देशों की पालना आवश्यक है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संंदीप/बच्चन-hindusthansamachar.in