प्रधानमंत्री मोदी के चिंतन ने जखनी की जल क्रांति को गति दीः उमाशंकर पाण्डेय

प्रधानमंत्री मोदी के चिंतन ने जखनी की जल क्रांति को गति दीः उमाशंकर पाण्डेय
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नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। बुंदेलखंड में जल संरक्षण के लिए सक्रिय और हाल में ही केंद्र सरकार के पहले जलयोद्धा सम्मान से नवाजे गए उमाशंकर पाण्डेय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चिंतन ने जखनी की जल क्रांति को गति दी है। अगर इसी रफ्तार से समूचे देश में जल संरक्षण के लिए कार्य हुआ तो आने वाले दो दशक में देश के किस्सी भी हिस्से में पानी का संकट नहीं रहेगा। उन्होंने 'हिन्दुस्थान समाचार' से कहा कि केंद्र सरकार की कोशिशों से लोग जागरूक हो रहे हैं। सामुदायिक प्रयास हो रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि पानी के लिए तीसरा विश्वयुद्ध होने की भविष्यवाणी को भारत झुठला देगा। वह कहते हैं कि सामुदायिक काम का बड़ा असर होता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उनका गांव जखनी है। बांदा जिले के इस छोटे से गांव के प्रयास ने अपना सूखा दूरकर सबको नई राह दिखाई है। जलयोद्धा पाण्डेय ने कहा कि मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से अब बुंदेलखंड का सूखा खत्म हो रहा है। जखनी गांव ने सामुदायिक प्रयास से 'खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़' के पुरखों के मूलमंत्र को अपनाया। तालाबों को पुनर्जीवित किया गया। खेतों की मेड़ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी और गांव के बचे पानी का रुख तालाबों की ओर मोड़ दिया गया । वह कहते हैं कि उनके गांव के सभी छह तालाब बारहमासी लबालब रहते हैं। गांव के 30 कुओं का जलस्तर 15 -20 फीट पर आ चुका है। उन्होंने कहा कि जखनी के मूलमंत्र को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने मान्यता दी। उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरा सहयोग किया। नतीजा यह है कि पिछले 5 वर्षों में 1 मीटर 34 सेंटीमीटर जिले का भू जलस्तर बढ़ा है। ऐसी रिपोर्ट माइनर एजुकेशन डिपार्टमेंट उत्तर प्रदेश ने दी है। बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी आदि में धान का रकबा बढ़ा है। लाखों कुंटल धान पानी से होता है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में किसानों ने फसल बोने का रकबा बुंदेलखंड में मेड़बंदी करके तीन लाख हेक्टेयर से अधिक बढ़ाया है। बुंदेलखंड आत्मनिर्भर हो रहा है। उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की दिलचस्पी से अधिकारियों ने जखनी का रुख किया । ग्राम जखनी को संपूर्ण भारत के लिए जलग्राम की मान्यता मिली । प्रत्येक जिले में जखनी माडल पर जलग्राम के लिए 2 गांव चुने गए। वर्तमान में जलक्रांति अभियान के अंतर्गत जलशक्ति मंत्रालय ने जखनी माडल पर जलग्राम बनाने के लिए देश के 1050 गांवों की सूची मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और जल शक्ति मंत्री शेखावत के प्रयासों से जल संरक्षण की इस तकनीक को समझने, जानने के लिए देश -विदेश के जल विशेषज्ञ, सरकार की विशेषज्ञ समिति, 2030 वर्ल्ड वाटर रिसोर्स ग्रुप, कृषि प्राद्योगिक विश्वविद्यालय केंद्रीय भूजल बोर्ड जल जीवन मिशन उत्तर प्रदेश, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जल वैज्ञानिक और छात्र लगातार जखनी पहुंच रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/मुकुंद/सुनीत-hindusthansamachar.in