नक्सली नेता प्रशांत बोस से रांची में पांच राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां कर रहीं पूछताछ, कई अहम सुराग मिले

 नक्सली नेता प्रशांत बोस से रांची में पांच राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां कर रहीं पूछताछ, कई अहम सुराग मिले
police-and-central-agencies-of-five-states-are-interrogating-naxalite-leader-prashant-bose-in-ranchi-many-important-clues-found

रांची, 16 नवंबर (आईएएनएस)। पिछले पांच दशकों से सीपीआई-माओवादी नक्सलियों के ऑपरेशन का मास्टरमाइंड रहे प्रशांत बोस उर्फ किशन दा से रांची में पांच राज्यों की पुलिस के साथ-साथ एनआईए और आईबी की टीमें पूछताछ कर रही हैं। 74 वर्षीय प्रशांत बोस और उसकी पत्नी 57 वर्षीय शीला मरांडी के साथ उनके चार अन्य सहयोगियों को पिछले 12 नवंबर को झारखंड के सरायकेला जिले में कांड्रा टोल ब्रिज के पास गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सोमवार को अदालत से इन दोनों को पूछताछ के लिए सात दिन के रिमांड पर लिया है। इसके बाद देर शाम इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रांची लाया गया। बताया गया कि पांच राज्यों बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश पुलिस पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय पुलिस एजेंसियों की टीमों द्वारा प्रशांत बोस से पूछताछ होने से नक्सली वारदातों और उनकी आगामी रणनीति के बारे में हर बारीक पहलू को पकड़ने और आगे जांच बढ़ाने में मदद मिलेगी। उसपर इन सभी राज्यों में 100 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। राज्यों की पुलिस टीमें ऐसे सभी मुकदमों और नक्सली वारदातों की फाइलें लेकर रांची पहुंचे हैं, ताकि एक-एक के बारे में प्रशांत से पूछताछ की जा सके। प्रशांत बोस भाकपा माओवादी संगठन में देश के स्तर पर दूसरे नंबर का लीडर है। इस संगठन द्वारा पिछले पांच दशक में देशभर में अंजाम दिये गये लगभग सभी नक्सली वारदातों की प्लानिंग के पीछे उसकी प्लानिंग रही है। वह 1974 में झारखंड के हजारीबाग जिले में गिरफ्तार किया गया था। लगभग दो वर्षों के बाद जब वह जेल से छुटा तो उसने बिहार, बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सली संगठन के विस्तार में सबसे अहम रोल निभाया। पिछले साढ़े चार दशकों से वह इन राज्यों की पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए मोस्ट वांटेड बना हुआ था। झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा का कहना है कि प्रशांत बोस की गिरफ्तारी इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इस स्तर का कोई नक्सली लीडर आज तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया था। यह प्रशांत बोस ही है, जिसने डेढ़ दशक पहले नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप और एमसीसी का विलय कराया था। इसके बाद उसे संगठन में नंबर दो की जगह मिली थी। बीते 12 नवंबर को गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक पूछताछ में उसने पुलिस को यह जानकारी देकर चौंका दिया था कि देश के प्रधानमंत्री भी नक्सली संगठन के निशाने पर हैं। पुलिस को जानकारी मिली है कि प्रशांत बोस फिलहाल झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सली संगठनों की कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक प्रशांत बोस करने वाला था। इस बैठक में माओवादी संगठन के सभी बड़े नेताओं को शामिल होना था। इसमें संगठन की आगे की रणनीति और मॉडस ऑपरेंडी तय करने वाला था। इस बैठक में शामिल होने के लिए पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा ने अपने दो बॉडीगार्ड प्रशांत बोस के पास पारसनाथ भेजे थे। ये दोनों बॉडीगार्ड भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। प्रशांत बोस समेत छह माओवादियों की गिरफ्तारी के बाद छानबीन में पुलिस को चार मोबाइल फोन, दो एसडी कार्ड, एक पेन ड्राइव मिला था। जो जानकारी मिल रही है एसडी कार्ड में पूरे संगठन का खाका के साथ-साथ उनकी आगामी योजनाओं का ब्लू प्रिंट मौजूद है। संगठन में कौन किस पद पर है, कितने लोग काम कर रहे हैं, कहां काम कर रहे हैं, उनके मददगार कौन हैं, इसके बारे में भी पुलिस को अहम सूचनाएं हाथ लगी हैं। बताया गया है कि प्रशांत बोस और उसकी पत्नी शीला मरांडी के स्वास्थ्य की जांच भी लगातार की जा रही है। पूछताछ अलग-अलग सेशन में की जा रही है। जानकारी मिली है कि विगत वर्षों में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी, जो किशन के साथ काम कर चुके हैं, उन्हें भी पूछताछ के दौरान बुलाया जा सकता है। --आईएएनएस एसएनसी/आरजेएस

अन्य खबरें

No stories found.