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लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर जमानती वारंट वापस लिया गया

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फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश), 6 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी और पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद के खिलाफ जारी एक गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को फरुर्खाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वापस ले लिया है। नोटिस में कहा गया है कि इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को अंतरिम जमानत दी गई है। फरुर्खाबाद अदालत ने लुईस खुर्शीद की अध्यक्षता वाले एक ट्रस्ट के लिए केंद्रीय अनुदान के कथित दुरुपयोग के मामले में वारंट जारी किया था। फरुर्खाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दिसंबर 2019 में आरोपी को अंतरिम जमानत दी गई थी और मामला अभी भी हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है, इसलिए अदालत द्वारा जारी एनबीडल्ब्यू के कार्यान्वयन को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया जाता है। अदालत ने संबंधित पुलिस थाने से गैर जमानती वारंट को तत्काल वापस लेने का भी निर्देश दिया। बता दें कि डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को 30 मार्च 2010 को भारत सरकार से 71.50 लाख रुपये दिव्यांगों को उपकरण बांटने के लिए मिले थे। इस फंड से फरुर्खाबाद सहित उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में दिव्यांगों के बीच व्हीलचेयर और श्रवण यंत्र (ठीक से सुनने का उपकरण) बांटे जाने थे। कैंप लगाकर दिव्यांगों को उपकरण बांटे जाने थे, लेकिन आरोप है कि न कोई कैंप लगाया गया और न ही उपकरण बांटे गए। फर्जी रिपोर्ट के आधार पर अनुदान का बंदरबांट किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद 32 लाभार्थियों की सूची सत्यापन रिपोर्ट के साथ भारत सरकार को भेजी गई थी। भारत सरकार के आदेश पर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन उत्तर प्रदेश लखनऊ को सौंपी। सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर कथित रूप से जाली थे और नकली मुहरों का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया गया था कि वितरण शिविर आयोजित किए गए थे। एक न्यूज चैनल ने दावा किया कि दिव्यांगों के लिए दिए गए पैसे का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया। कायमगंज की पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद ने हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट में चैनल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया मगर यह अंतत: 2015 में सुलझा लिया गया, जबकि ट्रस्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया था। --आईएएनएस एकेके/एएनएम