अदन की खाड़ी में ​​समुद्री डकैती ​रोकने को एकजुट हुईं चार देशों की नौसेनाएं

अदन की खाड़ी में ​​समुद्री डकैती ​रोकने को एकजुट हुईं चार देशों की नौसेनाएं
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- भारत के अलावा इटली, स्पेन और फ्रांस की नौसेनाएं ले रही हैं अभ्यास में हिस्सा - एंटी पायरेसी ऑपरेशन में पहले से तैनात भारतीय युद्धपोत त्रिकंद भी हुआ शामिल नई दिल्ली, 18 जून (हि.स.)। अदन की खाड़ी में शुक्रवार से यूरोपीय संघ नौसेना बल (यूनावफोर) का दो दिवसीय पहला नौसैन्य अभ्यास शुरू हुआ। दो दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में भारत के अलावा इटली, स्पेन और फ्रांस की नौसेनाओं के पांच युद्धपोत भाग ले रहे हैं। समुद्री डकैती रोधी अभियानों के लिए पहले से अदन की खाड़ी में तैनात भारतीय स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद इस संयुक्त नौसेना अभ्यास में भाग ले रहा है। नौसेना प्रवक्ता विवेक मधवाल के अनुसार इन दो दिनों में उन्नत वायु रक्षा और पनडुब्बी रोधी अभ्यास, क्रॉस डेक हेलीकॉप्टर संचालन, सामरिक युद्धाभ्यास, बोर्डिंग संचालन, पुनःपूर्ति, खोज और बचाव, मैन ओवरबोर्ड अभ्यास और अन्य समुद्री सुरक्षा संचालन का अभ्यास होगा। अभ्यास में इटालियन नेवी शिप आईटीएस करबिनेरे, स्पेनिश नेवी शिप ईएसपीएस नवर्रा और दो फ्रेंच नेवी शिप एफएस टोनररे और एफएस सुरकुफ युद्धपोत हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास के दौरान भारत, इटली, स्पेन और फ्रांस की नौसेनाओं के जहाज समुद्री क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपने युद्ध-लड़ाकू कौशल और एक एकीकृत बल के रूप में अपनी क्षमता को बढ़ाने और सुधारने का प्रयास करेंगे। अभ्यास के पहले दिन शुक्रवार को भारतीय नौसेना सूचना संलयन केंद्र, हिन्द महासागर क्षेत्र और समुद्री सुरक्षा केंद्र, अफ्रीका के समुद्री सुरक्षा केंद्र के बीच आभासी 'सूचना साझाकरण अभ्यास' किया गया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ नौसेना बल और भारतीय नौसेना समुद्री डकैती रोधी ऑपरेशन और इसके लिए तैनात जहाजों की सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर एकजुट हैं। भारतीय नौसेना और यूनावफोर के बीच बहरीन में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली साझा जागरुकता और संघर्ष-विरोध बैठकों के माध्यम से नियमित रूप से बातचीत होती है। यह जुड़ाव भारतीय नौसेना और यूनावफोर के बीच तालमेल, समन्वय और अंतर-संचालन के बढ़ते संबंधों को प्रदर्शित करता है। यह अभ्यास नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने में साझेदार नौसेनाओं के मूल्यों को भी रेखांकित करता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत