नड्डा, शाह और अरुण सिंह ने कर्नाटक की स्थिति पर की चर्चा, नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन

 नड्डा, शाह और अरुण सिंह ने कर्नाटक की स्थिति पर की चर्चा, नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन
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नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के नाम को फाइनल करने के लिए चर्चा की। दरअसल कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आलाकमान कर्नाटक के लिए नए मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रहा है। संसद भवन में हुई बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक प्रभारी अरुण सिंह भी मौजूद रहे। सूत्रों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व द्वारा चुने गए नामों को मंजूरी के लिए भाजपा के संसदीय बोर्ड को सूचित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कर्नाटक भाजपा विधायक दल का केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाए जाने की संभावना है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, नड्डा और शाह, जो कल रात गोवा और उत्तर पूर्व से राष्ट्रीय राजधानी लौटे थे, ने सिंह के साथ दक्षिणी राज्य के एक नए मुख्यमंत्री को खोजने के लिए कर्नाटक की स्थिति पर चर्चा करने के लिए आज मुलाकात की है। संसदीय बोर्ड को इसकी मंजूरी के लिए कर्नाटक के संभावित मुख्यमंत्री के बारे में सूचित किया जाएगा। पता चला है कि बैठक में एक पर्यवेक्षक को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया गया है, जो संभावित नामों के साथ अगले मुख्यमंत्री का चुनाव करने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक की देखरेख करेगा। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नड्डा, शाह और सिंह के बीच बैठक एक घंटे तक चली और कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का पता लगाने के लिए विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि राज्य में जाति समीकरण को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने कुछ नामों को शॉर्टलिस्ट किया है। सूत्रों ने कहा, कर्नाटक की राजनीति में जाति एक महत्वपूर्ण कारक है और राज्य के सामाजिक समीकरणों को देखते हुए नए मुख्यमंत्री का चयन किया जाएगा। पार्टी इस बात पर भी विचार कर रही है कि नया मुख्यमंत्री मजबूत लिंगायत समुदाय से होगा या किसी अन्य समुदाय से। हालांकि, सूत्रों ने दावा किया कि लिंगायत के मजबूत नेता येदियुरप्पा की जगह गैर लिंगायत को लाना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इससे पहले, उन्हें हटाने के बारे में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए, येदियुरप्पा ने राज्य की राजधानी में राज्यपाल थावरचंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राज्य में भाजपा के निवर्तमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने स्पष्ट किया कि पार्टी आलाकमान की ओर से उन पर इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं था। राजभवन के अपने दौरे के बाद बोलते हुए, नए मुख्यमंत्री के पद संभालने तक अंतरिम मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे येदियुरप्पा ने कहा कि उन्होंने राज्य में एक नए सीएम के लिए रास्ता बनाने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी संगठन की सेवा करने वाली राजनीति में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में पार्टी से कोई पद नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा, मेरे बेकार बैठने या राजनीति से बाहर जाने का कोई सवाल ही नहीं है। मैं हर बार पार्टी को सत्ता में वापस लाने का प्रयास करूंगा। उन्होंने कहा, मैं एक बार फिर यह कहना चाहता हूं कि दिल्ली से कोई दबाव नहीं था। मैंने केवल पद पर दो साल पूरे होने के अवसर पर इस्तीफा देने का फैसला किया है। येदियुरप्पा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे कोई फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं किया। मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूं, ताकि पार्टी राज्य में एक नया चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित कर सके। भाजपा आलाकमान कर्नाटक के नेतृत्व को बदलने की प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंतित जरूर था, लेकिन पूर्व सीएम येदियुरप्पा के स्वेच्छा से इस्तीफा देने के बयान के बाद आलाकमान ने राहत की सांस ली होगी। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान, येदियुरप्पा ने राज्य में संभावित परिवर्तन से बार-बार इनकार किया। दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान, येदियुरप्पा ने प्रधान मंत्री मोदी, नड्डा, शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उनकी नई दिल्ली यात्रा राज्य इकाई में उनके खिलाफ बढ़ रही आवाजों की पृष्ठभूमि में हुई। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, दिल्ली दौरे के दौरान, येदियुरप्पा को उनके खिलाफ पार्टी के भीतर बहुत विरोध के कारण इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। --आईएएनएस एकेके/एएनएम

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