गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने के लिए मोहन ने गुवाहाटी में बेच दी फर्नीचर की दुकान
गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने के लिए मोहन ने गुवाहाटी में बेच दी फर्नीचर की दुकान
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गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने के लिए मोहन ने गुवाहाटी में बेच दी फर्नीचर की दुकान

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सुरेन्द्र बेगूसराय, 23 जुलाई (हि.स.)। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से उत्पन्न भागम-भाग के बीच केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना ने आत्मनिर्भर भारत निर्माण को एक नई ऊर्जा दिया है। इस अभियान से देश को आत्मनिर्भर और अपने प्रदेश को सशक्त बनाने के लिए बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों से प्रवासी कामगार अपने गांव की ओर लौट रहे हैं। देश के तमाम बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के संक्रमण में इन प्रवासियों को घर आने के लिए मजबूर कर दिया। लॉकडाउन के बाद अनलॉक होने पर असम में बड़े पैमाने पर रोजगार शुरू हुआ, काम-धंधा शुरू हो गया। लेकिन जब फिर से कोरोना तेजी से बढ़ा और ग्रामीण भारत की बुनियाद को श्रम शक्ति से सशक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो महत्वाकांक्षी योजना शुरू की तो प्रदेश में रह रहे कामगारों में उत्साह जगा और यह सब गांव की ओर जाने वाली ट्रेन पकड़ने लगे हैं। स्टेशन पर उतरते ही बगैर किसी को कहे सुने सबसे पहले सदर अस्पताल जाकर जांच के लिए सैंपल देने के बाद अपने घर पहुंच रहे हैं। रोजगार छोड़कर, दुकान बेच कर गांव आए इन श्रमिकों को आशा है कि प्रधानमंत्री द्वारा 20 जून को शुरू किया गया यह रोजगार अभियान ना केवल गांव में रोजगार उपलब्ध कराएगा। बल्कि गांव के आधारभूत संरचना को भी दुरुस्त करेगा ताकि आने वाले समय में भी इन श्रमिकों लगातार रोजी-रोटी मिलता रहे। इस अभियान के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 25 प्रमुख क्षेत्रों का चयन किया गया है। इन क्षेत्रों से संबंधित मंत्रालय एवं राज्य सरकारों को इस अभियान से जोड़ा गया है, जो कि श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराएगा। 125 दिन तक चलने वाले इस अभियान के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था किया गया है तो निश्चित रूप से यह गांव को एक नई दशा और दिशा तय करेगा। कुशल और अकुशल श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। सदर बाजार गुवाहाटी से फर्नीचर का दुकान बेच कर अपने गांव आ चुके मटिहानी के राधे शर्मा और मोहन शर्मा ने बताया कि हम लोग वहां अच्छे से कमा रहे थे। लॉकडाउन के दौरान काम बंद था, लेकिन अपना रोजगार था तो घर के अंदर ही किसी तरह कर रहे थे, जी रहे थे। लेकिन इसी बीच जब केंद्र सरकार द्वारा यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई तो हम लोगों में एक नया जोश आ गया है। मोहन ने बताया कि देश में पहली ऐसी सरकार बनी है जिसमें हम गरीबों के बीच इतने व्यापक पैमाने पर रोजगार अभियान शुरू किया है। मोबाइल के माध्यम से जानकारी मिली कि ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, सड़क विभाग, पेयजल और स्वच्छता विभाग, पर्यावरण विभाग, रेलवे, ऊर्जा विभाग, कृषि विभाग आदि के द्वारा इस अभियान को गति दिया जा रहा है, तो दुकान बेच कर गांव आ गए हैं। हम लोग कुशल श्रमिक हैं और अब यहीं फर्नीचर का अपना व्यवसाय शुरू करेंगे। हमारे इलाके में लोगों को अभी भी ओल्ड मॉडल फर्नीचर ही मिल रहा है लेकिन अब महानगर डिजाइन का फर्नीचर बनाएंगे। इससे हम आत्मनिर्भर होंगे, हमारा परिवार समाज सशक्त बनेगा, लोगों की घर की रौनक भी बढ़ेगी। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in