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आयुर्वेद और समकालीन चिकित्सा प्रणालियों को लेकर आयुष मंत्रालय ने जेएनयू सह‍ित 4 संस्‍थाओं के साथ किया समझौता

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नई दिल्ली, 16 फरवरी (हि.स.)। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेदिक और समकालीन दोनों चिकित्सा प्रणालियों के साथ समग्र दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए मंगलवार को जेएनयू सहित चार शैक्षणिक संस्थाओं के बीच समझौता किया। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), जेनेटिक इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीजीईबी), ट्रांस-डिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय (टीडीयू), बेंगलुरु और केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), आयुष मंत्रालय ने एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए। इसके अंतर्गत एक अनुसंधान परियोजना को चलाया जाएगा जिसमें सिस्टम बायोलॉजी दृष्टिकोण द्वारा स्वस्थ मनुष्यों में प्रकृति के आणविक हस्ताक्षरों का परिसीमन किया जाएगा। समझौता के तहत विकसित बौद्धिक संपदा को चारों संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से साझा किया जाएगा। केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय के निदेशक प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने इस अवसर पर कहा कि यह सी.सी.आर.ए.एस. द्वारा संचालित यह एक अनूठी अनुसंधान परियोजना में से एक है। उन्होंने आयुर्वेदिक और समकालीन दोनों चिकित्सा प्रणालियों के साथ समग्र दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। यह परियोजना जो आयुर्वेदिक प्रकृति के आणविक हस्ताक्षरों के परिसीमन की परिकल्पना करती है, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास होगी। यह परियोजना न केवल वैयक्तिकृत चिकित्सा के क्षेत्र में नए ज्ञान को जोड़ेगी बल्कि क्षेत्र में अनुसंधान के लिए नई दिशाएं भी प्रदान करेगी। इसलिए, वर्तमान परियोजना नए ज्ञान को जोड़ने के साथ ही भावी अनुसंधानों के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। जेएनयू के कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार ने आयुर्वेदिक ज्ञान को समझने और इसे सामाजिक लाभ के लिए सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य बनाने के लिए समकालीन तकनीक जैसे बहु-ओमिक्स और संगणक तकनीकों का उपयोग करने पर बल दिया। इस संबंध में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान सत्र से जे.एन.यू. में आयुर्वेद जीवविज्ञान एक नया एकीकृत स्नातक-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू हो चुका है। डॉ. दिनाकर एम. सालुंके, निदेशक, आई.सी.जी.ई.बी., नई दिल्ली ने सटीक कल्याण के लिए समकालीन नैदानिक विज्ञान के साथ आयुर्वेद ज्ञान को एकीकृत करने की आवश्यकता की वकालत की। प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रति-कुलपति जे.एन.यू., जो एक प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक है, इस बहु-संस्थागत अनुसंधान दल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने इस परियोजना की मुख्य विशेषताओं की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें सभी प्रकृति के विभिन्न आणविक हस्ताक्षर जैसे प्रोटीन, जीन प्रतिलेखन, चयापचयों (मेटाबॉलिज्म) और सूक्ष्म-जीवाणुओं का अध्ययन वर्ष के दोनों अयानों में किया जाएगा। अत्याधुनिक तरीकों और तकनीकों का उपयोग कर परिसीमन किया जाएगा । हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in