नई शिक्षा नीति पर बोले डिप्टी CM मनीष सिसोदिया- पुरानी समस्याओं से दबी हुई है यह पॉलिसी
नई शिक्षा नीति पर बोले डिप्टी CM मनीष सिसोदिया- पुरानी समस्याओं से दबी हुई है यह पॉलिसी
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नई शिक्षा नीति पर बोले डिप्टी CM मनीष सिसोदिया- पुरानी समस्याओं से दबी हुई है यह पॉलिसी

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दिल्ली (Delhi) के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से स्वीकृत की गई नई शिक्षा नीति (New Education Policy) को ‘हाईली रेगुलेटेड और पुअरली फंडेड’ करार दिया है. सिसोदिया ने कहा कि देश को 34 साल से नई शिक्षा नीति का इंतजार था. यह 54 पेज की नई पॉलिसी है, अच्छा प्रोग्रेसिव डॉक्यूमेंट है जो आज की खामियों को स्वीकार करता है और आज क्या होना चाहिए उसपर बात करता है. पुरानी समस्याओं से दबी हुई है नई शिक्षा नीति उन्होंने कहा कि लेकिन नई शिक्षा नीति में एक दिक्कत है कि पुरानी समस्याओं से दबी हुई है. साथ ही यह लागू कैसे होगी इसके बारे में भी इसमें ज्यादा जानकारी नहीं है. मनीष सिसोदिया के मुताबिक इस नई शिक्षा नीति में कितनी खूबियां और कितनी कमियां? HRD का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है, ये अच्छी बात है. शिक्षा का काम मानव संसाधन मंत्रालय से नहीं हो सकता. देश में शिक्षा मंत्रालय ज़रूरी है. मिड-डे मील के साथ-साथ नाश्ते का जिक्र किया है, ये अच्छी बात है. राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की बात एक सही है. यह पॉलिसी हाईली रेगुलेटेड और पुअरली फंडेड शिक्षा मॉडल देती है. नई शिक्षा नीति कहती है कि 6 फीसदी GDP का हिस्सा शिक्षा पर देना चाहिए, लेकिन ये बात तो 1966 से की जा रही है. मैंने पहले कहा था कि कानून बनाना चाहिए कि हर राज्य 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च करे. इस पॉलिसी में कहा गया है कि नर्सरी से 12वीं तक शिक्षा मुफ्त हो, लेकिन यह कैसे होगा यह भविष्य में बताएंगे. 6 साल में आपने पॉलिसी बनाई और आप ये तय नहीं कर पाए. पॉलिसी कहती है कि सबको समान शिक्षा दी जाएगी, लेकिन एक बच्चा आंगनबाड़ी में जा रहा है और एक प्राइवेट, प्री-प्राइमरी में जा रहा है. क्वालटी एजुकेशन देना हर सरकार की जिम्मेदारी है. हम कहते हैं कि सरकारी स्कूलों को इतना अच्छा कर दो कि बच्चे सरकारी में ही जाएं, लेकिन ये नई शिक्षा नीति प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देती है. 34 साल बाद एक नई शिक्षा नीति आई है और आप उसमें भी प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दे रहे हो? B.Ed को 4 साल का करना अच्छी बात है. इससे लगता है कि आप अच्छे शिक्षक और उनकी ट्रेनिंग को महत्व देना चाहते हैं. पॉलिसी कहती है कि बोर्ड एग्ज़ाम को आसान किया जाए, लेकिन इसके साथ ही रटने की बजाय समझने की क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए. दुनियाभर में बोर्ड एग्ज़ाम खत्म हो चुके हैं. इस पूरी नई शिक्षा नीति में से खेल का हिस्सा पूरी तरह से गायब है. पता नहीं खेल की अलग से नई पॉलिसी बना रहे हैं या नहीं? लेकिन खेल का हिस्सा इसमें तो नहीं है. अगर वित्तीय घाटे के लिए कानून हो सकता है तो शिक्षा पर बजट के लिए भी कानून बनाना चाहिए.-newsindialive.in