मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु वन विभाग को बाघ को नहीं मारने का दिया निर्देश

 मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु वन विभाग को बाघ को नहीं मारने का दिया निर्देश
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चेन्नई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। मद्रास उच्च न्यायालय की पहली खंडपीठ ने मंगलवार को राज्य के वन विभाग को निर्देश दिया कि वह मायावी एमडीटी 23 बाघ को तुरंत ना मारे। अदालत एक पशु अधिकार समूह, पीपुल फॉर कैटल इन इंडिया (पीएफसीआई) द्वारा दायर एक जनहित याचिका का जवाब दे रही थी। तमिलनाडु वन विभाग के मुख्य वन्यजीव वार्डन शेखर कुमार नीरज द्वारा तमिलनाडु के गुडलुर वन क्षेत्र में एमडीटी 23 बाघ के शिकार और हत्या का आदेश देने के बाद पशु अधिकार निकाय ने जनहित याचिका दायर की थी। अदालत ने पशु अधिकार निकाय की इस दलील पर सहमति जताई कि बाघ बिल्कुल भी आदमखोर नहीं हो सकता है और इसलिए वन विभाग को बड़ी बिल्ली को मारने के बजाय उसे शांत करने और पकड़ने का निर्देश दिया है। पिछले कुछ महीनों में स्थानीय लोगों द्वारा बाघ द्वारा चार मनुष्यों और 12 मवेशियों को मारने की शिकायत के बाद चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन ने हत्या का आदेश दिया है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वन कर्मियों की पांच टीमें पिछले नौ दिनों से बाघ की तलाश में हैं और शनिवार को मुख्य वन्यजीव वार्डन ने बाघ को मारने का आदेश दिया था। सिंगारा में बाघ देखे जाने की जानकारी ग्रामीणों द्वारा विभाग को दिए जाने के बाद मसीनागुडी और सिंगारा इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया है कि बाघ भूखा होगा, क्योंकि उसने पिछले कुछ दिनों से शिकार नहीं किया था। बाघ का पता लगाने और उसका शिकार करने के लिए ड्रोन, खोजी कुत्ते और कुमकी हाथियों को सेवा में लगाया गया है, लेकिन यह मायावी बना हुआ है। मुख्य वन्यजीव वार्डन, तमिलनाडु वन, शेखर कुमार नीरज, जिन्होंने बाघ को मारने का आदेश दिया था, कुमकी हाथी की सवारी करते हुए बाघ के शिकार में भी भाग ले रहे हैं। भारी बारिश और कोहरे से जंगल में अंधेरा पसरा हुआ है और यहां तक कि ड्रोन को भी रोक दिया है, जो बाघ को ट्रैक करने में सक्षम नहीं हैं। --आईएएनएस एचके/आरजेएस

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