केंद्रीय विद्यालय संगठन के डिप्टी कमिश्नर गुड़गांव ले गए, वहां बताया पीएम से बात कराएंगे तो कृतिका पहले घबराई फिर खुलकर की मन की बात
केंद्रीय विद्यालय संगठन के डिप्टी कमिश्नर गुड़गांव ले गए, वहां बताया पीएम से बात कराएंगे तो कृतिका पहले घबराई फिर खुलकर की मन की बात
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केंद्रीय विद्यालय संगठन के डिप्टी कमिश्नर गुड़गांव ले गए, वहां बताया पीएम से बात कराएंगे तो कृतिका पहले घबराई फिर खुलकर की मन की बात

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सीबीएसई 12वीं (साइंस) की परीक्षा में 96% अंक प्राप्त करने वाली महराणा गांव की कृतिका नांदल से रविवार को मन की बात प्रोग्राम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की। असल में 24 जुलाई को यह कार्यक्रम रिकॉर्ड हुआ था। जब कृतिका को केंद्रीय विद्यालय संगठन के डिप्टी कमिश्नर सरदार सिंह चौहान पीएम से बात कराने गुड़गांव ले गए थे। गुड़गांव में जब डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पीएम से बात कराने जा रहा हूं तो कृतिका को सहज विश्वास ही नहीं हुआ। गला सूखने लगा। यह देख डिप्टी कमिश्नर ने पानी पीने काे दिया। बोले कि घबराने की जरूरत नहीं है। सामान्य होकर बात करना। इस तरह उसने मोदी के सवालों का जवाब दिया। पीएम से बात के बाद उसके घर ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा भी बधाई देने पहुंचे। कृतिका ने बताया कि वह दो भाई-बहनों में बड़ी है। छोटा भाई वंश कक्षा 8 में है। पिता विनोद का गांव में मेडिकल स्टाेर था। पिता उसे प्यार से पुल्लू कहकर पुकारते थे। पूरे परिवार ने एक थाली में ही खाना खाया था, वह मेरी जिंदगी का सबसे सुखद पल कृतिका ने बताया कि पिता की दो एकड़ खेती है। मेडिकल स्टोर और खेतीबाड़ी से पिता को कभी फुर्सत नहीं मिल पाती थी। वह उन्हें भी वक्त नहीं दे पाते थे। 2016 में नोट बंदी के बाद काम कम हो गया। तब पहली बार पिता उन्हें लेकर हरिद्वार गए। कृतिका ने बताया कि पहली बार में परिवार ने एक थाली में खाना खाया। वह पल उसकी जिंदगी का सबसे सुखद पल था। क्योंकि उस दिन के बाद वह मौका फिर कभी नहीं मिल पाया। पिता की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। डेढ़ साल पहले दिमाग की नस फट जाने से उनकी मौत हो गई। सुबह 4 बजे जागकर डेढ़ घंटे की स्टडी, फिर मां का हाथ बंटाया कृतिका ने बताया कि सुबह 4 बजे वह मां के साथ जाग जाती थी। डेढ़ घंटा स्टडी की। फिर डेढ़ घंटा मां के साथ घर के काम में हेल्प करवाती थी। 7:30 बजे स्कूल बस आ जाती थी। स्कूल से लौटने के बाद पहले मां के साथ करती थी। उसके बाद पढ़ने बैठती थी। मां उसे घर का काम करने से रोकती थीं लेकिन वह नहीं मानती थी। क्योंकि मां सिलाई भी करती थीं। इसलिए वह थक जाती थीं। मां ने कहा कि हर कदम पर बढ़ना है आगे, शिक्षिकाओं ने दिया सहारा कृतिका ने बताया कि पिता की मौत के बाद वह टूट गई। लगा कि डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। तब मां ने कहा कि बेटी अब पीछे पलटकर नहीं देखना है। हर कदम आगे बढ़ना है। फिर शिक्षिकाओं ने सहारा दिया। प्रिंसिपल अनुपमा सिन्हा ने फीस हाफ करा दी। शिक्षिकाओं ने हर डाउट को दूर किया। कृतिका ने कहा कि बुआ नीलम ने भी बहुत मदद की। 70 साल के दादा रघुवीर भी साथ रहते हैं। दादा कहते हैं कि बेटा तू पढ़। पैसे की चिंता मत कर। हम इंतजाम कर लेंगे।-newsindialive.in