उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली प्राप्त करने के प्रयास में जम्मू-कश्मीर (कश्मीर भाग-3)

 उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली प्राप्त करने के प्रयास में जम्मू-कश्मीर  (कश्मीर भाग-3)
jampk-in-striving-to-achieve-excellent-education-system-kashmir-part-3

श्रीनगर, 20 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में 1950 के दशक से राज्य द्वारा संचालित संस्थानों में प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा मुफ्त हैं। इस तथ्य के बावजूद यहां एक उत्कृष्ठ शिक्षा प्रणाली नहीं है। 1930 में डोगरा महाराजा हरि सिंह द्वारा प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य कर दी गई थी। 1990 के दशक में कश्मीर में अलगाववादी हिंसा भड़कने के बाद, शिक्षा, सभी स्तरों पर, सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बड़ी संख्या में शिक्षक स्थानीय कश्मीरी पंडित थे। कश्मीर में आतंकवादी हिंसा के बाद शुरू हुए इस समुदाय के पलायन के साथ ही यहां शिक्षा व्यवस्था सचमुच चरमरा गई। स्कूलों और कॉलेजों को जला दिया गया और यहां तक कि कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति मुशीरुल हक, जो एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे, उनका अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी। 1990 के दशक के दौरान अधिकांश समय शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। सुरक्षा की चिंताओं ने माता-पिता और छात्रों दोनों की शैक्षणिक महत्वाकांक्षाओं को पीछे छोड़ दिया। शैक्षिक प्रणाली का पुनरुद्धार और इसे पटरी पर लाना 1990 के बाद जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आने वाली विभिन्न सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रही। बिखरी हुई शिक्षा प्रणाली का पुनरुद्धार कई वर्षों से धीमा था, लेकिन पिछले छह वर्षों के दौरान, स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि ने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में शिक्षा के स्तर और पहुंच को बढ़ाने के लिए बहुत प्रगति दिखाई है। देश के बाकी हिस्सों की तरह जम्मू-कश्मीर भी 10 प्लस 2 पलस 3 पैटर्न का पालन कर रहा है। नई राष्ट्रीय नीति के अनुसार, पैटर्न 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 में बदल जाएगा। 2020-2021 में बुनियादी शिक्षा के लिए बजट आवंटन 11,126 करोड़ रुपये (पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 23.49 प्रतिशत की वृद्धि), उच्च शिक्षा के लिए 1,440 करोड़ रुपये (पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 17.51 प्रतिशत की वृद्धि), स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए 4,901 करोड़ रुपये है। (पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.74 प्रतिशत की वृद्धि) और युवा सेवाओं और तकनीकी शिक्षा के लिए 738 करोड़ रुपये (पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 28.86 प्रतिशत की वृद्धि) की गई। जम्मू-कश्मीर में 12 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें 2 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 2 डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं। यहां एक आईआईटी, एक एनआईएफटी, एक आईआईएमसी, एक आईआईएम है। 20 से अधिक बी.एड कॉलेज हैं। पिछले साल की एनआईआरएफ रेटिंग के अनुसार, कश्मीर विश्वविद्यालय और जम्मू विश्वविद्यालय देश के 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार हैं। 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों में कश्मीर विश्वविद्यालय 48 वें और जम्मू विश्वविद्यालय 52 वें स्थान पर है। कटरा शहर में श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय एनआईआरएफ के अनुसार भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में 78 वें स्थान पर है। छात्रों की पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार ने 2013 में शगुन शिक्षा, समग्र शिक्षा, मध्याह्न् भोजन, दीक्षा, मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना, माध्यमिक स्तर पर दिव्यांगों की समावेशी शिक्षा और रूसा उच्च शिक्षा जैसे राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों को लागू किया है। 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू-कश्मीर की साक्षरता दर 67.16 प्रतिशत है, वहीं महिला और पुरुष साक्षरता दर क्रमश: 56.43 प्रतिशत और 76.75 प्रतिशत है। प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के लिए 1,000 से अधिक स्कूल हैं। 50 डिग्री कॉलेज और 12 विश्वविद्यालय हैं। यूटी के उच्च शिक्षा विभाग के विजन डॉक्यूमेंट में कहा गया है, जम्मू और कश्मीर को मूल्य आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए समान पहुंच प्रदान करके, विकसित सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के साथ तालमेल रखते हुए अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र बनाना है। जम्मू-कश्मीर के युवा हाल के वर्षों में देश में प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं, आईआईटी और आईआईएम में जगह बना रहे हैं। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह नोट करना उत्साहजनक है कि हमारी आबादी के आकार को देखते हुए, हमारे युवा लड़के और लड़कियां सिविल सेवाओं और अन्य प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में काफी संख्या में स्लॉट का दावा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा निर्धारित ऊंचे लक्ष्यों को देखते हुए, ऐसा प्रतीत होता है कि शैक्षणिक क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास के बावजूद, शैक्षणिक उत्कृष्टता के सपने को साकार करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश को मीलों दूर जाना है। --आईएएनएस आरएचए/आरजेएस

अन्य खबरें

No stories found.