दिल्ली की झुग्गियों और गलियों के हालात पर जामिया में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान

 दिल्ली की झुग्गियों और गलियों के हालात पर जामिया में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान
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नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के अंग्रेजी विभाग ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय व स्वीडिश रिसर्च काउंसिल के शिक्षकों के साथ स्पेस सब्जेक्ट, वर्नाक्यूलर ऑफ एंड्योरेंस इन डेल्हीज स्लम्स एंड स्ट्रीट्स व्याख्यान का आयोजन किया। इस दौरान दिल्ली शहर की झुग्गियों और गलियों, जैसे कुसुमपुर पहाड़ी, यमुना पुश्ता और यहां जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के हालात पर चर्चा की गई। शिक्षा मंत्रालय द्वारा समर्थित, शैक्षिक एवं अनुसंधान प्रोन्नति सहयोग योजना (स्पार्क) के तहत यह वार्ता जामिया, अमेरिकी अध्ययन विभाग, वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी के बीच चल रहे शैक्षणिक सहयोग के क्रम में आयोजित की गई। यह व्याख्यान क्रमिक रूप से प्रासंगिक व्याख्यानों की एक श्रृंखला के लिए प्रतिबद्ध है। वार्ता का संचालन अंग्रेजी विभाग, जामिया की पीएच.डी शोधार्थी श्रद्धा ए. सिंह, जहरा रिजवी और सुमन भागचंदानी ने किया। जिसमें दुनिया भर से विभिन्न टाइम जोन में कई विद्वानों, छात्रों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया। जामिया के अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा ने जामिया और वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के बीच चल रही सहयोगी परियोजना के क्रम में न्यू टेरेन्स ऑफ कोंसियसनेस, ग्लोबलाइजेशन, सेंसरी एन्वायर्मेंट्स एंड लोकल कल्चर्स ऑफ नोलेज के बारे में बताया। इसका उद्देश्य भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को सुविधाजनक बनाना है। प्रोफेसर ऐश अमीन ने दिल्ली शहर में झुग्गियों और गलियों, जैसे कुसुमपुर पहाड़ी, यमुना पुश्ता पर केंद्रित था। कई वार्ताकारों के माध्यम से, प्रोफेसर अमीन ने इन स्थानों के निवासियों की मानसिक स्वास्थ्य और आवास प्रथाओं के बीच संबंध स्थापित किया। उस पर ध्यान केंद्रित किया जिसे वे धीरज की स्थानीय भाषा कहते हैं, जो कि बुनियादी ढांचे, पड़ोस का परिचय, सामाजिकता और समुदाय की कल्पनाएं जैसे जीवन के कई पहलुओं पर आधारित है। अपने व्याख्यान के माध्यम से प्रोफेसर अमीन ने इन स्थानों के निवासियों के लिए प्रशिक्षण के अवसर, चिकित्सा सुविधाएं और अन्य सहायक बुनियादी ढाँचे प्रदान करने में केयर इंडस्ट्री के महत्व पर भी जोर दिया। दर्शकों की एक विस्तृत श्रृंखला और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, इस कार्यक्रम को यू ट्यूब पर भी लाइव स्ट्रीम किया गया, जिसमें सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। --आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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