भारत और ब्रिटेन ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत वर्ष 2030 तक का रोड़मैप किया जारी

भारत और ब्रिटेन ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत वर्ष 2030 तक का रोड़मैप किया जारी
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प्रधानमंत्री मोदी और जॉनसन के बीच वर्जुअल शिखरवार्ता मे बनी सहमति नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को वर्चुअल शिखर वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों के वर्ष 2030 दृष्टि पत्र को स्वीकार किया जिसके तहत रणनीतिक साझेदारी का स्तर ऊंचा कर इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदला जाएगा। शिखर वार्ता द्विपक्षीय संबंधों के सिलसिले में मील का पत्थर मानी जा रही है। दोनों देश सुरक्षा, शिक्षा, आव्रजन और व्यापार-निवेश क्षेत्र में संबंधों का विस्तार करेंगे। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूरोप और पश्चिम जी) संदीप चक्रवर्ती ने शिखर वार्ता के संबंध में प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2030 तक के लिए तैयार किए गए रोड मैप में दोनों देश व्यापार, रक्षा, जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी में विशेष सहयोग करेंगे। रोड मैप के क्रियान्वयन पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों निगरानी रखेंगे तथा इस संबंध में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को रिपोर्ट करेंगे। शिखरवार्ता के पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्रिटेन की गृहमंत्री प्रीति पटेल ने विचार-विमर्श के बाद आव्रजन और प्रतिभावान युवाओं के आवागमन संबंधी साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत के 3000 युवा पेशेवर लोगों को ब्रिटेन में 2 वर्ष तक के लिए काम करने का अवसर मिलेगा। संयुक्त सचिव ने बताया कि दोनों देश व्यापार और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौते और इसके पहले अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत को गति देने पर राजी हुए हैं। यह समझौता इस वर्ष के अंत तक अंजाम तक पहुंच सकता है। शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच एक दूसरे के बाजार तक पहुंच बनाने पर भी सहमति बनी। ब्रिटेन इस बात के लिए राजी हुआ कि वह भारत के कारोबारी लोगों को अपने मत्स्य उद्योग क्षेत्र में पहुंच उपलब्ध कराएगा। साथ ही भारतीय नर्सों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा। ब्रिटेन भारतीय नाविकों को अपने यहां काम करने के अवसर देने के लिए भारत के प्रमाणपत्रों को मान्यता देने पर भी राजी हो गया है। दोनों देशों ने सामाजिक सुरक्षा समझौता करने के लिए विचार-विमर्श पर भी सहमति जताई है। बाजार तक पहुंच के संबंध में भारत ब्रिटेन को फलों और चिकित्सा उपकरणों को अनुमति देने पर राजी हुआ है। दोनों देश स्नातकोत्तर उपाधियों को मान्यता देंगे तथा कानूनी सेवा को द्विपक्षीय आधार पर खोला जाएगा। इन कदमों से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 से 25 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कोरोना महामारी के संबंध में वैक्सीन के विकास और उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। नाक के द्वारा दी जाने वाली वैक्सीन और उपचार संबंधी क्लिनिकल ट्रायल में सहयोग पर भी फैसला किया गया है। भारत और ब्रिटेन में नवाचार सहयोग पर भी एक करार पर हस्ताक्षर किए गए। अपनी तरह की इस अनूठी साझेदारी के तहत विकासशील देशों में अन्वेषण और नई प्रौद्योगिकी का प्रसार किया जाएगा। दोनों देशों के बाजार में भारतीय नवाचार और प्रौद्योगिकी मुहैया कराने के लिए आवश्यक वित्तीय मदद दी जाएगी। दोनों देशों ने हिन्द-प्रशांत समुद्री क्षेत्र में सहयोग पर फैसला किया। ब्रिटेन हिन्द-प्रशांत में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप नौसैनिक बेड़े की तैनाती करेगा। भारत ने इस नौसैनिक बेड़े के साथ सैन्य अभ्यास करने पर रजामंदी व्यक्त की है। दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और उत्पादन क्षेत्र में भी सहयोग करने का फैसला किया। संदीप चक्रवर्ती ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि शिखर वार्ता के दौरान आर्थिक भगोड़े विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का भी मामला उठा। मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से कहा कि आर्थिक भगोड़ों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने जलवायु परविर्तन की समस्या पर भी चर्चा की तथा स्वच्छ उर्जा के विकास मे सहयोग करने का निश्चय किया । दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाने का फैसला किया तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कारगर कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप