भारत और यूरोपीय संघ ने किया मानवाधिकारों पर विचार-विमर्श

भारत और यूरोपीय संघ ने किया मानवाधिकारों पर विचार-विमर्श
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नई दिल्ली, 12 अप्रैल (हि.स.)। भारत और यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के बारे में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में विचार-विमर्श किया। दुनिया के दो बड़े शासन तंत्रों भारत और यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार 9 वें भारत यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव संदीप चक्रवर्ती और यूरोपीय संघ की ओर से वहां के नई दिल्ली स्थित राजदूत यूगो एस्टुटो ने भाग लिया। भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले वर्ष 15वीं शिखरवार्ता हुई थी। इसमें इस संवाद के आयोजन का फैसला किया गया था। इस दौरान दोनों पक्षों ने सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मानवाधिकारों को सशक्त बनाने के उपायों पर विचार किया। नागरिक व राजनीतिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, महिला सशक्तिकरण, बाल व अल्पसंख्यक अधिकारों पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने महसूस किया कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार इन्हें संरक्षित करने की प्रणाली को मजबूत और कारगर बनाए जाने की आवश्यकता है। यूरोपीय संघ ने अपने इस मत को दोहराया कि बिना किसी अपवाद के मृत्युदंड की सजा की मनाही होनी चाहिए। दोनों पक्षों ने लोकतंत्र, स्वतंत्रता, विधि के शासन और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए साझा विश्वास का विषय हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप