इतिहास के पन्नों मेंः 12 जून

इतिहास के पन्नों मेंः 12 जून
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फ़ैसले की घड़ीः स्थान- इलाहाबाद उच्च न्यायालय का कोर्टरूम नंबर- 24, तारीख- 12 जून 1975, दिन-गुरुवार। सुबह 10 बजे न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा देश के बहुचर्चित राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी मामले का फ़ैसला सुनाने जा रहे थे। इसी मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने 18 मार्च को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। इंदिरा गांधी को तक़रीबन पांच घंटे तक सवालों के जवाब देने पड़े। जिसकी देश-दुनिया में बड़ी चर्चा थी। आज इस कानूनी मामले के फ़ैसले की घड़ी थी। यह एतिहासिक मामला 1971 में रायबरेली के लोकसभा चुनाव से जुड़ा था, जिसमें इंदिरा गांधी ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजनारायण को हराया था। इस चुनावी नतीजे को राजनारायण ने अदालत में यह कहते हुए चुनौती दी थी कि इंदिरा गांधी ने सरकारी मशीनरी व संसाधनों का दुरुपयोग कर जीत हासिल की है जिसे निरस्त किया जाए। लिहाजा, अब निर्णायक घड़ी आ गयी थी। जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ठीक दस बजे कोर्ट रूम में पहुंचे और फ़ैसला सुनाना शुरू कर दिया। उन्होंने राजनारायण की याचिका में इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ जो सात मुद्दे गिनाए गए थे, उनमें से पांच में न्यायमूर्ति ने इंदिरा गांधी को राहत दी लेकिन दो मुद्दों पर उन्होंने इंदिरा गांधी को दोषी पाया। जस्टिस सिन्हा ने अपने आदेश में लिखा कि इंदिरा गांधी ने अपने चुनाव में भारत सरकार और अधिकारियों व सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया। जन प्रतिनिधित्व कानून में इनका इस्तेमाल भी चुनाव कार्यों के लिए गैर कानूनी था। इसे आधार बनाकर जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी का रायबरेली से लोकसभा के लिए हुआ चुनाव निरस्त कर दिया। यह पहला अवसर था जब हाईकोर्ट के जज ने किसी प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ ऐसा फ़ैसला सुनाया हो। इंदिरा गांधी की तरफ से 22 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर के सामने अपील आई, जिसमें इंदिरा गांधी की तरफ से मशहूर अधिवक्ता पालखीवाला और राजनारायण की तरफ से शांतिभूषण अदालत में आए। 24 जून को जस्टिस अय्यर ने फ़ैसला दिया कि इंदिरा गांधी संसद की कार्यवाही में भाग तो ले सकती हैं लेकिन वोट नहीं कर सकतीं। इन अदालती फ़ैसलों के बाद इंदिरा गांधी राजनीतिक रूप से बुरी तरह घिर गयीं और 25 जून को जब दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में रैली हुई तो इंदिरा गांधी जैसे बेकाबू हो गयीं। उन्होंने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। अन्य अहम घटनाएंः 1964ः अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करने वाले अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला को सरकार के विरुद्ध साजिश रचने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गयी। 1972ः महात्मा गांधी के जीवन पर आठ खंडों पर ग्रंथ लिखने वाले डीजी तेंदुलकर का निधन। 2002ः बालश्रम निषेध दिवस की शुरुआत। हिन्दुस्थान समाचार / संजय