इग्नू के एकेडेमिक काउंसलर्स ने मांगा केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसा मानदेय

 इग्नू के एकेडेमिक काउंसलर्स ने मांगा केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसा मानदेय
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नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉन कॉलेजिएट के शिक्षकों की सैलरी (मानदेय ) को लेकर विवाद सुलझा ही नहीं था कि अब इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ( इग्नू ) के एकेडेमिक काउंसलर का मुद्दा सामने आया है। उनका कहना है कि स्कूल ऑफ ओपन लनिर्ंग (एसओएल) और दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को यूजीसी गाइडलाइंस के अनुसार फरवरी 2019 से प्रति लेक्च र 1500 रुपये दिए जाते है जबकि इग्नू में एकेडेमिक काउंसलर को स्नातकोत्तर ( एमए, एम कॉम ) की कक्षाएं लेने वाले काउंसलर को दो घंटे के 1100 रुपये और 330 रुपये कन्वेंस के दिए जाते है। स्नातक डिग्री (बीए, बी कॉम) के एकेडेमिक काउंसलर को 770 रुपये दो घंटे के और 330 रुपये कन्वेंस के दिए जाते है। एक सेंटर के काउंसलरों ने बताया है कि कोरोना के कारण ऑन लाइन क्लासेज होने से इन काउंसलरों को कन्वेंस राशि नहीं दी जा रही है । इसके कोडिनेटर को प्रति माह 6600 रुपये ,असिस्टेंट कोडिनेटर को 4620 रुपये प्रति माह व संस्थान के मुखिया, प्रिंसिपल को 4950 रुपये मिलते है। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) के अध्यक्ष डॉ हंसराज सुमन का कहना है कि दो अलग-अलग केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षकों के मानदेय को लेकर यह विसंगति क्यों? कई कॉलेजों के शिक्षकों ने जो यहाँ कक्षाएं ले रहे है, इस तरह के भेदभाव को लेकर उन्होंने चिंता जताई है। उनका कहना है कि डीयू के एसओएल ,नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड व नियमित कॉलेज के शिक्षकों की कक्षाएं एक घंटे की है जबकि इग्नू में एकेडेमिक काउंसलर की कक्षा दो घंटे की है। प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि इग्नू में एकेडेमिक काउंसलर होते है जबकि डीयू में इन्हें गेस्ट टीचर्स कहा जाता है ,दोनों का कार्य पढ़ाना है। बता दें कि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में इग्नू के टीचिंग सेंटर 70 से अधिक है ,नॉन कॉलेजिएट 26 सेंटर और एसओएल लगभग 20 सेंटर चल रहे है। इग्नू सेंटर पर पढ़ाने वाले वहीं के शिक्षकों के अलावा इग्नू के रिजनल डायरेक्टर के यहां से नियुक्ति होती है। डॉ सुमन ने बताया है कि यूजीसी ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिव को एक सकरुलर भेजा था जिसमें अतिथि शिक्षकों के मानदेय की बढ़ोतरी 28 जनवरी 2019 से की गई थी। इस सकरुलर में प्रति लेक्च र 1500 रुपये और एक महीने में अधिकतम 50 हजार रुपये अतिथि शिक्षकों को दिए जा सकते है। एसओएल और नॉन कॉलेजिएट, नियमित कॉलेजों ने अपने यहां प्रति लेक्च र 1500 कर दिया है लेकिन इग्नू ने उसे अभी तक लागू नहीं किया है जिसे लेकर इसमें पढ़ाने वाले काउंसलर में गहरा रोष व्याप्त है। शिक्षकों ने इसे यूजीसी नियमों का उल्लंघन बताया है । उनका कहना है कि जिस दिन से अतिथि शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी हुई है उसी दिन से उनकी बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए । डीटीए ने गेस्ट टीचर्स गाइडलाइंस को लागू करते हुए एकेडेमिक काउंसलर का मानदेय दिल्ली विश्वविद्यालय के बराबर करने की मांग इग्नू के कुलपति से की है । गौरतलब है कि इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) डीयू का हिस्सा नहीं है। इनकी क्लॉसेज व सेंटर डीयू के विभिन्न कॉलेजों में खुले हुए हैं। यूजीसी नियमों का पालन शिक्षकों की नियुक्तियों व पदोन्नति में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक समान है। इसलिए शिक्षकों का कहना है कि जब यूजीसी द्वारा मानदेय में बढ़ोतरी हुई है तो इग्नू सेंटर को भी बढ़ाना चाहिए । उनका कहना है जबकि सातवें वेतन आयोग में शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन इग्नू के एकेडेमिक काउंसलर को आज भी पुराने रेट से ही मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने इग्नू के कुलपति से मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा दिए जा रहे अतिथि शिक्षकों को मानदेय वह अपने इंदिरागांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ( इग्नू ) में भी लागू करें । --आईएएनएस जीसीबी/आरजेएस

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